आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ७)


आम्बा हल्दी (हरिद्रा, Turmeric) एक महत्त्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है और रसोईमें काम आनेवाला एक महत्वपूर्ण पदार्थ भी । भारतीय भोजनकी हल्दीके बिना कल्पना करना भी कठिन है । इसमें ‘करक्यूमिनोइड्स’ और ‘वोलाटाइल’ तत्व मुख्य रूपसे पाए जाते हैं । शीत ऋतुमें हल्दीकी गांठका उपयोग सबसे अधिक लाभदायक है और यह समय हल्दीसे होने वाले लाभको कई गुणा बढा देता है; क्योंकि कच्ची हल्दीमें हल्दी पाउडरकी तुलनामें अधिक गुण होते हैं । यह अदरककी भांति दिखाई देती है, इसे ‘कच्ची हल्दी’ भी कहते हैं ।
आइए, कच्ची हल्दीके गुणोंके बारेमें जानते हैं –
शीत प्रकोप – रात्रिको सोनेसे पूर्व हल्दी वाला दूध पीनेसे निद्रा अच्छी आती है और शीत प्रकोप (जुकाम, खांसी) भी दूर होता है । इसे दूधमें गुड या शक्कर मिलाकर लिया जा सकता है । इसे जलमें उबालकर भी लिया जा सकता है ।
शारीरिक वेदना – शरीरकी वेदनाके लिए कच्ची हल्दी ‘पेरासिटामोल’से अधिक लाभकारी है और न ही इससे कोई हानि होती है । गठिया रोगमें होने वाली जोडोंकी वेदनामें यह लाभकारी है ।
कर्करोग – कच्ची हल्दीमें कर्करोगसे (कैंसरसे) लडनेके गुण होते हैं । यह पुरुषोंमें होने वाले पौरुष ग्रन्थिके (प्रोस्टेट) कर्करोगके उत्तकोंको (सेल्सको) बढनेसे रोकनेके साथ-साथ उन्हें समाप्त भी कर देती है । यह हानिकारक विकिरणके (रेडिएशनके) सम्पर्कमें आनेसे होने वाले ‘ट्यूमर’से भी बचाव करती है ।
मधुमेह – कच्ची हल्दीमें इंसुलिनके स्तरको सन्तुलित करनेका गुण होता है । इस प्रकार यह मधुमेह रोगियोंके लिए बहुत लाभदायक होती है । इंसुलिनके अतिरिक्त यह शर्कराको (ग्लूकोजको) भी नियन्त्रित करती है, जिससे मधुमेहके समय किए जाने वाले उपचारका प्रभाव बढ जाता है ।
सेवन – इसे फलोंके रसमें डालकर, दूधमें उबालकर, चावलके व्यंजनोंमें डालकर, अचारके रूपमें, चटनी बनाकर और सूपमें मिलाकर उपयोग किया जा सकता है ।
सेवनमें सावधानियां –
१. हल्दीका सेवन करनेसे रक्त पतला होता है, ऐसेमें जिन लोगोंकी अभी-अभी शल्यचिकित्सा हुई हो या होने वाली हो, उन्हें हल्दीका सेवन नहीं करना चाहिए ।
२. हल्दीकी प्रकृति उष्ण होती है तो इसे सीमित मात्रामें ही प्रयोग करना चाहिए, अन्यथा इसके अधिक सेवनसे गैस और उदर विकार हो सकते हैं ।
३. उष्ण दूध अथवा जलमें इसके सेवनके पश्चात सामान्य जलका सेवन कदापि न करें !
४. यदि आप मधुमेहकी औषधियां ले रहे हैं तो हल्दीके उपयोगसे पूर्व चिकित्सकीय परामर्श अत्यन्त आवश्यक है ।



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