मन्दिरको मिलने वाले दानसे चलनेवाला सहस्राब्दीसे भी प्राचीन चिकित्सालय : जहां थे चिकित्सक, शल्यचिकित्सक, परिचारिकाएं और भीतोंपर लिखी उपचार विधियां
२० मई, २०२१
सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर कुछ हिन्दूद्वेषी लिख रहे हैं “हम चिकित्सालयके लिए लडे ही कब थे ? हम तो मन्दिरके लिए लडे थे ?” उन्हें उत्तर एक मन्दिर दे रहा है, जो ११०० वर्षोंसे पूर्वसे स्थापित है । मन्दिरद्वारा स्थापित इस चिकित्सालयमें १५ शैय्या, कई चिकित्सक तथा शल्यचिकित्सक हुआ करते थे । दूरद्रष्टा हिन्दू राजाओंने नागरिकोंकी स्वास्थ्य सुविधाओंका भी पूरा ध्यान रखा था ।
प्राचीन भारत अथवा मध्यकालमें संचालित होनेवाला ये एकमात्र भारतीय चिकित्सालय नहीं है । इसके अतिरिक्त थिरुवक्कम, तंजावुर तथा श्रीरंगममें भी ऐसे चिकित्सालय चलाए जाते थे । चिकित्सालयोंको तब ‘अतुलार सलाई’ कहा जाता था ।
ये मन्दिर तमिलनाडुके कांचीपुरममें स्थित है, जो एक प्राचीन नगर है । इस मन्दिरको चोल राजाओंने बनवाया था ।
जिस संस्कृतिमें सन्ध्यामें सूर्यास्तके पश्चात पेडकी पत्ती तोडना भी निषिद्ध हो, वहां मन्दिर परमार्थके केन्द्र सदैवसे रहे हैं और आज भी हैं । मन्दिरोंके विरुद्ध विषवमन करनेवाले हिन्दूद्वेषी यह देखना नहीं चाहते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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