१२ दिसम्बर, २०२०
मोहम्मद इकबालको देहलीके उच्च न्यायालयने मुक्त कर दिया है । देहलीमें गत वर्ष हुए उपद्रवोंमें, उसपर हत्याके आरोप थे । इन उपद्रवोंके मध्य, जिहादियोंद्वारा हिन्दुओंके अनेकों निवासों और व्यवसायिक संस्थानोंको जला दिया गया था । न्यायमूर्ति सुरेश कुमारने, उससे पन्द्रह सहस्र रूपयोंके प्रतिज्ञापत्रपर (बॉण्डपर) प्रतिभूति (जमानत) दे दी । न्यायालयके अनुसार, चार अन्य आरोपी भी इससे पूर्व मुक्त किए जा चुके हैं और इकबालका उनके साथ कोई सम्बन्ध नहीं सिद्ध हो सका है; इसीलिए उसे मुक्त किया जा सकता है । इकबालके प्रकरणमें, चार अभिवक्ताओंने (वकीलोंने) न्यायालयमें प्रतिनिधित्व किया ।
इससे पूर्व भी इकबालको किसी अन्य काण्डमें बीस सहस्रकी प्रतिभूतिपर मुक्त किया गया था; जबकि एक अन्य हत्याके प्रकरणमें उसे मुक्ति नहीं मिली थी । उसके परिजन अनुसार, वह तीन मित्रों सहित मांस क्रय करनेके लिए निकला था और पुलिसने उसे बन्दी बना लिया था ।
जिहादियोंके दबावमें आकर, हत्यारे अपराधियोंको एक साधारणसी प्रतिभूतिपर मुक्त कर दिया जाता है और निर्दोष हिन्दुओंको लम्बे समयतक प्रताडित किया जाता है । ऐसी व्यवस्थाको परिवर्तित करनेके लिए हिन्दुओंको, हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए जाग्रत होकर प्रयास करना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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