‘डीयू’के पाठ्यक्रमसे महाश्वेता देवीकी ‘द्रौपदी’ हटानेका ‘एनडीटीएफ’ने किया समर्थन, वामपन्थियोंके हिन्दू विरोधी प्रचारको हटाया गया
२७ अगस्त, २०२१
देहली विश्वविद्यालयने ‘बीए’ अंग्रेजी पाठ्यक्रमसे महाश्वेता देवीकी लघुकथा ‘द्रौपदी’को पाठयक्रमसे हटा दिया है । साथ ही, तमिल लेखक बामा और सुकरिथरणीकी रचनाओंको भी पाठ्यक्रमसे हटाया गया है । इसपर अनवरत विवादके मध्य ‘नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट’ने इस परिवर्तनका स्वागत किया है ।
वास्तविकमें महाश्वेता देवीकी लघुकथाको लेकर कई प्रश्न उठे थे । इसके पश्चात विश्वविद्यालयकी अकादमिक परिषदने प्रकरणको संज्ञानमें लेते हुए इसे हटानेका निर्णय लिया । अब ‘द्रौपदी’के स्थापर एक छोटी कहानी ‘ह्यसुल्तानाज ड्रीम्स’को पाठ्यक्रममें सम्मिलित किया गया है ।
‘द्रौपदी’, महाश्वेता देवीद्वारा बंगालीमें लिखी गई एक लघुकथा है और गायत्री स्पिवकद्वारा अंग्रेजीमें अनुवाद किया गया है । इस कहानीको ‘डीयू’के पाठ्यक्रममें कई वर्षोंसे पढाया जा रहा था । कहनेको यह एक आदिवासी महिलाके अपमानके इर्द-गिर्द घूमता है; परन्तु हिन्दू धर्मको नीचा दिखानेका एक कपटी प्रयास है । कहानीमें मात्र महिलाके ‘प्राइवेट बॉडी पार्ट’, यौन दुराचार और यौन आक्रमणोंका अश्लील विवरण है । ‘एनडीटीएफ’का कहना है कि इस कहानीका परिचय प्रतिष्ठित महाभारतके चरित्रके लिए विशेष रूपसे आपत्तिजनक है ।
आजकलके विद्यालयोंमें अधिकसे अधिक हिन्दू धर्मके विरुद्ध शिक्षा दी जा रही है; जिसका परिणाम है कि हिन्दू बच्चे मन्दिर जानेके स्थानपर ‘चर्च’ जाना रुचिकर लगता है तथा उन्हें धर्मका कुछ भी ज्ञान नहीं होता है और यही कारण है कि अधिकतम हिन्दू अपनी स्वीकृतिसे धर्म परिवर्तन भी करवा रहे हैं । यदि इसी प्रकार चलता रहा तो भविष्यमें हिन्दुओंकी संख्या बहुत अल्प हो जाएगी; अत: हिन्दू बच्चोंको धर्मके बारेमें उचित शिक्षा मिलना अत्यन्त आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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