आपातकालमें देवताको ऐसे करें प्रसन्न ! (भाग-१०)


अन्नपूर्णा कक्षमें रोटी बनानेके पश्चात प्रथम रोटी गायको देनी चाहिए तथा अन्तिम रोटीपर कुत्तेका अधिकार होता है ।
उसी प्रकार आटा या चावल पकाने हेतु निकालते समय उसे एक मुट्ठी पहले किसी पात्रमें निकालकर रखें एवं जो भी भिक्षुक या मांगनेवाला आता है उसे दे दें ! ऐसा करनेसे आपके घरमें अन्नका भण्डार कभी भी रिक्त नहीं होगा ! आपको सम्पूर्ण जीवनमें कभी भी अन्नके अभावका सामना नहीं करना पडेगा और अन्नपूर्णा मां विपरीतसे विपरीत परिस्थितिमें आपको सदैव ही अन्न देंगी ।
 यदि आपके नगरमें गोमाता नहीं हैं, आजके निधर्मी लोकतन्त्रमें नगरोंमें अब गोमाता नहीं दिखाई देती हैं तो ऐसेमें आप उस रोटीके टुकडे पशु-पक्षियोंको खाने हेतु डाल दें ! वैसे ही आजकल महानगरोंमें भिक्षुकको भी घरमें घुसने नहीं दिया जाता है तो आप उस आटे या चावलको किसी मन्दिरके पास बैठे भिखारीको दे दें या एक साथ उतना अन्न किसी आश्रममें दान कर दें ! हिन्दू धर्म हमें त्यागकी वृत्ति सिखाता है, कालान्तरमें सब स्वार्थी हो गए और आज समाज उसीका परिणाम भोग रहा है । पूर्वकालमें बिना किसी अतिथि, विप्र या भिक्षुकको खिलाए, गृहस्थ अन्न ग्रहण नहीं करता था; किन्तु आज स्थिति विपरीत हो चुकी है । आपके घरमें देवत्व भोगसे नहीं त्यागसे निर्माण होगा यह ध्यान रखें !
   हिन्दू राष्ट्रमें महानगरों या नगरोंके प्रत्येक वसतीगृहमें (कॉलोनीमें) एक गोशाला होगी ही इससे लोग प्रथम रोटी गायको कैसे खिलाएं ?, यह समस्या निर्माण ही नहीं होगी !


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution