अपनी चूकें कैसे ढूंढें ? (भाग – १)


स्वाभाव दोष निर्मूलन प्रक्रिया आरम्भ करनेवाले एक व्यक्तिने कहा कि आज मैं सतर्क था; इसलिए मुझसे कोई चूक नहीं हुई ! कलियुगमें लोगोंमें दोष और अहंका प्रमाण इतना अधिक है कि एक सर्व सामान्य व्यक्तिसे दिनभरमें लगभग २०० चूकें होती हैं, यदि आपकी वृत्ति बहिर्मुख है तो आपको अपनी चूकें ध्यानमें नहीं आएंगी और जब तक वृत्ति अन्तर्मुख नहीं होती, साधना आरम्भ ही नहीं होती है !; इसलिए अपने दोषोंके कारण दिनचर्यामें होनेवाली चूकोंको ढूंढकर उसे लिखें और उसे दूर करने हेतु स्वाभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया करें !
चूकें कैसे ढूंढ सकते हैं, इस हेतु हम आपको कुछ छोटे-छोटे तथ्य बताते हैं, उसका पालन आरम्भ करें, आपको अपने व्यक्तित्वके दोष स्वतः ही ध्यानमें आने लगेंगे !
अपनी दिनचर्या लिखनेका अभ्यास करें ! अर्थात कल प्रातःकालसे रात्रि सोने तक आपकी दिनचर्या क्या होगी, उसका पूर्व नियोजन कर लिखें ! अब जो आपने दिनचर्या एक दिवस पूर्व लिखी थी, क्या उसका पालन आप कर पाए ?, इसका सूक्ष्मतासे अभ्यास करें ! अब जो दिनचर्या आपने बनाई थी, वह ऐसी थी क्या कि आप उसका पालन कर सकें या वह इतनी आदर्श थी कि उसे उतारा ही नहीं जा सके ! जैसे आप प्रतिदिन सात बजे सवेरे उठते हैं, किन्तु दिनचर्यामें आपने लिखा मैं चार बजे उठूंगा तो यह अनुचित नियोजन है । आपके शरीरको भी एक समय उठनेकी वृत्ति हो जाती है, उसे धीरे-धीरे परिवर्तित करें, जैसे मैं साढे छह बजे उठूंगा और एक माहके पश्चात छ बजे उठनेका नियोजन करें ! इसप्रकार दिनचर्याका नियोजन करते समय आपको कैसे नियोजन करना चाहिए कि उसका पालन सहज हो जाए यह देखें ! – तनुजा ठाकुर (क्रमश:)



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