अपनी चूकें कैसे ढूंढें ? (भाग – २)


दिनचर्याके माध्यमसे अपनी चूकें कैसे ढूंढें ?
रात्रिमें अपनी अगले दिनकी दिनचर्या लिखकर रखें ! अगले दिवस रात्रिमें अपनी दिनचर्याकी समीक्षा करें और किन दोषोंके कारण आप अपनी दिनचर्याका नियोजन अनुसार पालन नहीं कर पाएं, उन दोषोंसे सम्बन्धित चूकें लिखें ! जैसे प्रातःकाल छ: बजे ध्वनिसंकेत(अलार्म) बजनेपर भी उसे आलस्यवश बन्द कर सो जाना । यहांसे अपनी दिनचर्याकी तटस्थ होकर समीक्षा है एवं विशेषकर किन दोषोंके कारण आपको या आपके सहयोगी या परिजनको अधिक कष्ट होता है, उसका भी स्मरण दिनचर्याके मध्य करते हुए चूक लिखें ! जैसे समयका पालन न करना, स्मरणहीनता, सब मेरे अनुसार ही कार्य करे, ऐसा सोचना इत्यादि । ऐसे दोषोंकी सूची बनाकर रखें ! आरम्भमें रात्रिमें चिन्तन कर अपनी चूकें लिखें और आगे चलकर दिनभर जब चूक जो जाए तो उसे संक्षेपमें अवश्य लिखकर रखें ! यह आत्मशुद्धिकी प्रक्रिया है, इससे हमारा मन विकार रहित होगा और मनके शुद्ध और निर्मल होनेसे साधना कर ईश्वरप्राप्ति करना सरल हो जाता है । यदि चूकें ऐसा करनेपर भी ध्यान न आये तो अपने गुरु या आराध्य देवतासे प्रार्थना कर अपनी अन्तर्मुखता बढाए । (क्रमश:)



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