अप्रैल २४, २०१९
पुलवामामें केन्द्रीय सुरक्षा बल ‘सीआरपीएफ’पर हुए आतंकी आक्रमणके पश्चात सुरक्षा बलोंने आतंकियोंके विरुद्ध अभियानको तीव्र किया है । इसीका प्रभाव है कि आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’का घाटीमें कोई अधिकारी (कमांडर) बननेको सज्ज नहीं है । ‘लेफ्टिनेंट जनरल’ के.जे.एस ढिल्लनने घाटीमें आतंकवादसे निपटनेके प्रश्नको लेकर यह बात कही । समाचार माध्यमोंसे बात करते हुए ढिल्लनने कहा, “जैश-ए-मोहम्मदके विरुद्ध हमने कार्यवाही की, जिससे ऐसी स्थिति बन गई है कि कोई भी इस आतंकी संगठनका नेतृत्व लेनेको सज्ज नहीं है ।”
बुधवार, २४ अप्रैलको श्रीनगरमें हुई इस सामुहिक प्रेस वार्तामें सेनाकी ओरसे १५वीं कोरके ‘कमांडर’ केजेएस ढिल्लन, ‘सीआरपीएफ’के ‘आईजी’ जुल्फिकार हसन और जम्मू-कश्मीर पुलिसके ‘आईजी’ एसपी पाणी सम्मिलित हुए । जीओसी केजेएस ढिल्लनने कहा कि पुलवामाके आतंकी आक्रमणके पश्चात सेनाने कश्मीर घाटीमें अपनी कार्यवाही तीव्र की है । १४ फरवरीके पश्चात सेनाने घाटीमें ४१ आतंकियोंको ढेर किया है, जिसमें ‘जैश-ए-मोहम्मद’के २५ आतंकी भी सम्मिलित हैं । जीओसीने बताया कि मारे गए आतंकियोंमें १३ पाकिस्तानी आतंकी भी सम्मिलित हैं । इसके अतिरिक्त भिन्न-भिन्न कार्यवाहीमें सेनाने १२ आतंकियोंको बन्दी भी बनाया है ।
डीजीपी दिलबाग सिंहने कहा कि गत वर्ष २०१८ में सेनाने कश्मीर घाटीमें कुल २७२ आतंकियोंको ढेर किया था । इसके अतिरिक्त बडी संख्यामें आतंकियोंको बन्दी भी बनाया था । इसके पश्चात घाटीमें आतंककी राह चुननेवाले युवाओंकी संख्यामें न्यूनता आई, जो कि एक अच्छा संकेत है ।
“इसका अर्थ स्पष्ट है कि इच्छाशक्तिके बलपर आतंकका सफाया निश्चित ही किया जा सकता है ! राजनीतिक स्वार्थसे प्रेरित होनेके कारण ही आजतक सेनाको बांधे रखा गया, हम सैनिकोंके प्राणोंकी आहुति देते रहे और साथमें देशको भी आतंकियोंके भरोसे छोड दिया । कांग्रेसको इसका उत्तर देशको देना चाहिए कि जो कार्य अभी हो रहा है, वह पहले क्यों नहीं हो पाया ? और देशके नागरिकोंने भी अब एक सशक्त शासनको ही चुनना चाहिए । ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
Leave a Reply