अशुद्ध धनसे कुपुत्र ही मिलते हैं, सुपुत्र नहीं !


      कुछ समय पूर्व एक स्त्री, जो हमारी परिचित हैं, वे बता रही थीं कि उनका बडा सुपुत्र अभियान्त्रिकीकी (इंजीनियरिंगकी)  शिक्षा ग्रहण कर रहा है । उन्होंने अपने छोटे सुपुत्रको चिकित्सक बनाने हेतु, उसे उससे सम्बन्धित प्रतिस्पर्धावाली परीक्षा दिलवाई; किन्तु जब वह उसमें उत्तीर्ण नहीं हो पाया तो उसे किसी निजी चिकित्सा महाविद्यालयमें अभिदान (डोनेशन) देकर उसे वहां पढाने लगे । उस स्त्रीने कहा, “देखिए ! आजकलके बच्चे कैसे होते हैं ?, मेरा बडा पुत्र कह रहा है कि आपने छोटे भाईको चिकित्सक बनाने हेतु महाविद्यालयमें जितना अभिदान (डोनेशन) दिया था, उतनी राशि मुझे भी दें ! आजके कलियुगी बच्चे आगे जाकर क्या हमारी सेवा करेंगे पता नहीं ?”
 इन महोदयाके पति एक भ्रष्ट अधिकारी हैं । जब आपका धन अशुद्ध होता है तो आप चाहे जितना भी अपने बच्चोंको उच्च शिक्षित कर दें, उनमें सुसंस्कार नहीं आ सकता है । अशुद्ध धनसे कुपुत्र ही मिलते हैं, सुपुत्र नहीं ! यह सभी भ्रष्टाचारी ध्यान रखें !


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