तत्काल सामान्य विद्यालयोंमें परिवर्तित किए जाएं असमके सभी मदरसे : मुख्यमन्त्री हिमांता बिस्वा सरमा
२० मई, २०२१
सर्बानंद सोनोवालके नेतृत्ववाले विगत असम शासनके निर्णयको लागू करते हुए असमके मुख्यमन्त्री हिमांता बिस्वा सरमाने अधिकारियोंको भंग किए गए मदरसोंको त्वरित सामान्य स्कूलोंमें परिवर्तित करनेकी प्रक्रिया आरम्भ करनेका निर्देश दिया है ।
दिसंबर, २०२० में असम विधानसभाने असम निरस्तीकरण विधेयक २०२० पारित किया था, जो असम मदरसा शिक्षा अधिनियम १९९५ और असम मदरसा शिक्षा मण्डलको समाप्त कर देता है । इस अधिनियममें मदरसोंके लिए शासकीय अनुदान समाप्त करने साथ ही वर्तमानमें ६२० से अधिक मदरसोंको १ अप्रैल, २०२१ तक सामान्य विद्यालयोंमें परिवर्तित किया जाना था ।
मुख्यमन्त्री हिमांता बिस्वा सरमाके अनुसार, “सडकें, चिकित्सालय आदि बनानेका क्या लाभ ? जब एक विशेष समुदायके लोग भूमिपर अतिक्रमण करेंगे, महिलाओंका बलात्कार करेंगे । ” उन्होंने कहा था, “मुसलमान अत्यन्त आक्रामक हैं । वे चाहते हैं कि उनकी पत्नियां दशकाधिक (दर्जनभर) बच्चोंको जन्म दें ! मुसलमानोंको मदरसे चाहिए होते हैं, जबकि उनके बच्चे ‘डॉक्टर’, ‘इंजीनियर’ बनना चाहते हैं; इसलिए मुझे मदरसोंसे समस्या है । हमने असममें उन्हें बन्दकर दिया है । मैंने मदरसोंमें जाकर देखा है, वे छात्रोंको कुछ नहीं सिखाते, वे उन्हें वहां ‘मुल्ला’ बनना सिखाते हैं । मुसलमान बच्चोंको ‘डॉक्टर-इंजीनियर’ बनाओ । मैं मुसलमानोंके विरुद्ध नहीं हूं । यदि मैं एक मुसलमान लडकीको ‘डॉक्टर’ बननेमें सहायता करता हूं तो मुझे ‘अल्लाहसे दुआ’ मिलेगी । मुझे बदरुद्दीन अजमलके अनुयायियोंकी ‘दुआएं’ नहीं चाहिए ।”
बिना किसी भयके अपनी बात स्पष्ट रूपसे कहनेवाले और उसका क्रियान्वयन करनेवाले ऐसे ही नेताओंकी आज देशको आवश्यकता है । ये वही हैं, जिन्होंने चुनावसे पूर्व कहा था कि मुझे मुसलमानोंके मत नहीं चाहिए; क्योंकि मैं मांगूगा भी तो वे देंगे नहीं । असमके मुख्यमन्त्री हिमांता बिस्वा सरमाकी भांति ही सभी नेताओंको मुसलमान तुष्टीकरण त्यागकर मदरसा शिक्षाको प्रतिबन्धित करनेकी दिशामें शीघ्र ही कृतिशील होना चाहिए । यही देशहितमें होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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