अक्तूबर ३, २०१८
भारतके असममें अवैध (गैरकानूनी) रूपसे रह रहे सात रोहिंग्या प्रवासियोंको गुरुवारको म्यांमार वापस भेजेगा । नई दिल्लीमें अधिकारियोंने बताया कि ऐसा प्रथम बार है, जब भारतसे रोहिंग्या प्रवासियोंको म्यांमार वापस भेजा जा रहा है । गृह मन्त्रालयके अधिकारीने बताया कि मणिपुर स्थित मोरेह सीमा चौकीपर सात रोहिंग्या प्रवासियोंको गुरुवारको म्यामार अधिकारियोंको सौंपा जाएगा । ये अवैध प्रवासी वर्ष २०१२ में पुलिसद्वारा बन्दी बनाए जानेके पश्चात असमके सिलचर स्थित ‘हिरासत केन्द्र’में रह रहे हैं ।
अधिकारीने बताया कि पडोसी देशके शासनके अवैध (गैरकानूनी) प्रवासियोंकी रखाइन राज्यमें पुष्टि करनेके पश्चात इनकी म्यामां नागरिकताकी पुष्टि हुई है ।
भारत शासनने गत वर्ष संसदको बताया था कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी विभाग यूएनएचसीआरमें पंजीकृत १४ सहस्त्रसे अधिक रोहिंग्या लोग भारतमें रहते हैं । यद्यपि सहायता प्रदान करने वाले विभागोंने देशमें रहने वाले रोहिंग्या लोगोंकी संख्या लगभग ४० सहस्त्र बताई है !
रखाइन राज्यमें म्यांमार सेनाके कथित अभियानके पश्चात रोहिंग्या लोग अपने प्राण बचानेके लिए अपने घर छोडकर भागे थे । ‘संयुक्त राष्ट्र रोहिंग्या समुदाय’को सबसे अधिक दमित अल्पसंख्यक बताता है । मानवाधिकार समूह ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ने रोहिंग्या लोगोंकी दुर्दशा लिए आंग सान सू ची और उनके शासनको उत्तरदायी बताया है ।
“गत वर्षोंमें रोहिंग्याओंके लूटपाट, आगजनी व दुष्कर्मके समाचार सुननेके पश्चात यही प्रतीत होता है कि ये धर्मान्ध इसी योग्य है और भारत शासन त्वरित इन्हें बाहर करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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