चुनाव परिणामोंमें ‘भाजपा’की विजयपर मुसलमान कट्टरपन्थी, सामाजिक जालस्थानोंपर अनुसूचित जातिके लोगोंपर क्रोधित
१२ मार्च, २०२२
विधानसभा चुनावोंमें उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गोवा व मणिपुरमें ‘भाजपा’ विजयी हुई । इससे क्रोधित कट्टरपन्थी अपना क्रोध अनुसूचित जातिपर निकालते दिखाई दे रहे हैं ।
‘ट्विटर आईडी तमाशबीन’ने लिखा कि अनुसूचित जातिने अपने मत हिन्दुत्व आधारित राजनीतिकी ओर स्थानान्तरित कर लिए हैं ।
एकने लिखा, ‘कोविड’, प्रवासी सङ्कट, ‘बेरोजगारी’, दुष्कर्म के बाद भी ‘भाजपा’को विजयी बनाया । किसीने लिखा कि सिद्धिकी कप्पन एक अनुसूचित जातिकी लडकीसे दुष्कर्मके आरोपमें डेढ वर्षसे कारागृहमें है, तबभी हाथरससे ‘भाजपा’ विजयी हुई ।
एकने लिखा कि उत्तरप्रदेशमें अनुसूचित जातिने ‘भाजपा’को तो देहलीमें ‘आप’को मत दिया जो ‘आरएसएस’की ही इकाई है ।
जगदीश पटेलने इन सबका विरोध करते कहा कि सुनो पप्पू, तुम्हारे दास नहीं हैं अनुसूचित जातिके लोग, जिसे इच्छा होगी उसीको मत देंगे ।
अभीतक अनुसूचित जातिको अधिकतर विपक्षियोंने मात्र ‘वोट बैंक’ समझकर उन्हें मूढ बनाकर उनका शोषण किया है । वे हिन्दू हैं; परन्तु उन्हें स्वतन्त्रता पश्चात मुख्य हिन्दू धारासे भिन्न दर्शानेका प्रयास किया । यदि उन्हें यह बात ज्ञात हुई है तो यह अच्छी बात है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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