अतृप्त पितर नूतन घरमें पहलेसे ही सूक्ष्मसे बना लेते हैं अपना स्थान !


     मैंने अपने आध्यात्मिक शोधमें पाया है कि यदि किसीके घरमें पितृदोषका प्रमाण अधिक होता है और यदि वे गृह निर्माण कर रहे हों, तो उनके अतृप्त पितर उस नूतन घरमें पहलेसे ही सूक्ष्मसे अपना स्थान बना लेते हैं । गृह प्रवेशके अवसरपर वास्तुशान्ति पूजन इत्यादि करते समय, यदि वह पूजन भावपूर्ण हुआ हो, तो वे कुछ कालके लिए वहांसे चले जाते हैं एवं यदि वहांके निवासी नित्य पूजा-आरती, साधना व वास्तुशुद्धि हेतु योग्य प्रयास नहीं करते हैं तो उनके अतृप्त पूर्वज जो पहलेसे ही सूक्ष्मसे, स्थान बनाकर रखते हैं, वे वहां आकर निवास करने लगते हैं और उन्हें कष्ट देने लगते हैं; इसलिए यदि पितृदोषके कारण वास्तुदोष हो तो घर परिवर्तित करनेसे अधिक लाभ नहीं होता है ।
      इसलिए जब आप नूतन गृह निर्माण करना आरम्भ कर रहे हों एवं आपके घरमें तीव्र पितृदोष हो तो वहां या तो सर्वप्रथम एक गोशालाका निर्माण कर उसमें एक या कुछ गायें रखकर उनकी सेवा आरम्भ करें या कराएं और यदि यह सम्भव न हो तो नित्य उस स्थानपर वास्तु शुद्धि करें ! यह कैसे करना है ?, इसके विषयमें आपको पहलेके लेखोंमें बहुत बार बताया ही जा चुका है ।


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