अयोध्यापर टली सुनवाई, विहीपने कहा विधान (कानून) बनाए मोदी सरकार !


अक्तूबर २९, २०१८

अयोध्यामें राम जन्मभूमि विवादको लेकर उच्चतम न्यायालयमें सुनवाई तीन माहके लिए टल गई है ! न्यायालयमें सुनवाई टलनेपर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषदने सरकारसे राम मन्दिरपर विधान (कानून) लानेकी मांग दोहराई है ।

आरएसएसके अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमारने कहा है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालयने अपने निर्णयमें कहा था कि विवादित भूमिपर राम मंदिर था । उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभागकी खुदाईमें भी मंदिरके साक्ष्य मिले हैं । अब प्रश्न केवल भव्य राम मंदिरके लिए भूमि मिलनेका है । अरुण कुमारने कहा कि हमने पूर्वमें भी कहा है कि यदि न्यायालय इसपर निर्णय नहीं ले पा रहा है तो सरकारको कानून बनाना चाहिए । मंदिर बननेसे देशमें सद्भावका वातावरण बनेगा । इस प्रकरणपर संघ संतोंके साथ खडा है ।

वही इसपर विश्व हिन्दू परिषदने सोमवार, २९ अक्तूबरको कहा कि विहिप अनन्तकाल तक न्यायालयके निर्णयकी प्रतिक्षा नहीं कर सकती । विहिपके कार्याध्यक्ष आलोक कुमारने मोदी सरकारसे संसदके शीतकालीन सत्रमें इस विषयपर कानून बनानेका आग्रह किया ।

आलोक कुमारने कहा कि ५ अक्टूबरको सन्तोंकी उच्चाधिकार समितिकी बैठक हुई है, जिसमें यह निर्णय हुआ कि सर्वोच्च न्यायालयके निर्णयका अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा नहीं किया जा सकती !

आलोक कुमारने कहा कि राम मंदिरके निर्माणके लिए जनमत बनानेकी प्राथमिकता करते हुए विहिप सभी राज्यके राज्यपालोंको ज्ञापन दे रही है । इसके पश्चात् नवम्बर माहमें देश भरमें विहिप कार्यकर्ता क्षेत्रकी जनताके साथ अपने सांसदों एवं जनप्रतिनिधियोंसे मिलेंगे और राम मंदिरके निर्माणके लिए विधान (कानून) बनानेपर बल देंगे ।

उल्लेखनीय है कि न्यायालयने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना हक विवाद प्रकरणमें प्रविष्ट विनतीको अगले वर्ष जनवरीके प्रथम सप्ताहमें एक उचित पीठके समक्ष सूचीबद्ध किया है, जो सुनवाईकी तिथि निर्धारित करेगी ।


“सर्व हिन्दू विरोधी निर्णय लेनेके पश्चात् न्यायालयका राम मन्दिरपर निणय नहीं ले पाना, यह प्रश्नचिह्न निर्माण करता है; अतः अब भाजपा इसपर विधान बनाकर,भक्तोंकी आस्थाका मान कर मन्दिर निर्माण करे, ऐसी सभी हिन्दुत्वनिष्ठोंकी मांग है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : आजतक



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