महमूद मदनीका प्रखर वक्तव्य, अयोध्या विवादित ढांंचा मस्जिद नहीं, घर या मंदिरको छीनकर अल्लाहका घर नहीं बनाया जा सकता !!


मार्च २४, २०१९

अयोध्यामें चल रहे मंदिर-मस्जिद विवादमें मस्जिद पक्षको गहरा झटका लगा है । देशमें मुसलमानोंकी शीर्ष संस्थाओंमेंसे एक जमीयत ‘उलेमा-ए-हिन्द’के महासचिव मौलाना महमूद मदनीने कहा है कि अयोध्याके विवादित ढांचेको मस्जिद नहीं माना जा सकता । मदनीने यह भी कहा कि श्रीराम देशकी बहुसंख्यक आस्थाके प्रतीक हैं । मुसलमानोंद्वारा श्रीरामके अनादरके बारेमें उन्होंने कहा कि इसकी आज्ञा नहीं दी जा सकती ।

मदनीके अनुसार किसीके घर या मंदिरको बलपूर्वक छीनकर अल्लाहका घर नहीं बनाया जा सकता । बीबीसी गुजरातीके एक कार्यक्रममें अहमदाबादमें मदनीने यह वक्तव्य दिया ।

किसी भी पक्षकी पराजय न हो; इसलिए महमूद मदनीने आपसी वार्ताकेद्वारा इस प्रकरणका समाधान निकालनेका भी सुझाव दिया । उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायलयने भी लगभग ६० वर्षोंसे न्यायालयमें चल रहे इस प्रकरणको एक बार पुनः आपसी वार्तापर छोड दिया है ।


“क्या राम मन्दिरके लिए लडने भिडनेवाले तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेतागण, जो एक क्रूर आक्रान्ताके नामपर बनी एक अवैध मस्जिदके पक्षधर हैं, अब राम मन्दिरको बनवानेके लिए आगे आएंगें ? सम्भवतः नहीं ! क्योंकि उनका उद्देश्य किसी इस्लामके सम्मानसे नहीं, वरन इस्लामिक मानसिकतासे मिलनेवाले मतोंसे है । एक ओर तो इस्लामके उच्च पदपर बैठे लोग कह रहे हैं कि मस्जिद अवैध है तो दूसरी ओर धर्मान्ध इसे वैध बता रहे हैं । तो कहीं न कहीं वह जिहादी मानसिकता और मतों और सत्ताके लालची नेताओंका स्वार्थ ही है, जो राम मन्दिरके मध्यमें आ रहा है । राम मन्दिरका निर्माण तो होगा ही होगा; परन्तु इस संघर्षसे सबकी सत्यता उजागर हो रही है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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