यदि इस देशमें यदि आयुर्वेद या स्वदेशी चिकित्सा पद्धति या वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतिको विद्यालयोंको सूत्रबद्ध रीतिसे सिखाया जाना आरम्भ हो जाए तो शासनको इतने बडे-बडे चिकित्सालय खोलनेकी आवश्यकता ही नहीं होगी ! इसलिए विद्यालीयन पाठयक्रमोंमें योगासन, पप्राणायाम, भोजन कैसे करें, जल कितना और कब पीएं, घरमें उपलब्द्ध सामग्रियोंका रोग-निवारण हेतु कैसे उपयोग कर सकते हैं, जैसे सामान्य एवं सरल बातोंको अति शीघ्र सम्मिलित किया जाना चाहिए । इससे बच्चे तो स्वस्थ होंगे ही इसका प्रसार भी सहज ही होगा । वैदिक उपासना पीठके गुरुकुलमें ऐसे विषयोंका बाल्यकालके पाठ्यक्रमोंमें ही समावेश किया जाएगा ।
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