१५ दिसम्बर, २०२०
बिहारके पटनामें एक १७ वर्षीय नवयुवक अंशुकी हत्या कर दी गई । ‘अजीमाबाद कॉलोनी’के वासी अंशुके अङ्गोंको काटकर ‘कॉलोनी’के बाहर मार्गपर फेंक दिया गया था । अंशु किसी निजी संस्थानके लिए ‘होम डिलीवरी’की सेवा देता था । वह वहींपर किसी संगीत गुटसे भी जुडा हुआ था और इसप्रकार उसकी पहचान किसी लडकीसे हो गई । वह लडकी भी उसी क्षेत्रमें रहती थी ।
रात एक बजे लडकीद्वारा दूरभाष आनेपर अंशु औषधि ले जानेके लिए अपनी दुपहिया ‘बाईक’पर चल पडा । सवेरेतक नहीं लौटनेपर, परिजन उसे ढूंढनेके लिए निकल पडे । अंशुके भाई रितेश व चाचा कृष्ण देवने, मछली विक्रेताओंद्वारा सूचना मिलनेपर, मार्गमें रक्तसे लथपथ, उसका शव पाया । परिजनके अनुसार, उसका चलभाष बन्द पाया तो अनुमान लगाया कि वह मार्गमें अपने मित्रके घरपर रुक होगा । प्रेमिका लडकीका भाई अरमान मलिक भी अंशुसे अप्रसन्न था । उसने कई बार अंशुको गम्भीर परिणाम भुक्तनेके लिए धमकाया भी था ।
लडकेके परिजन व आक्रोशित भीडने ‘अरमान’के घरपर पथराव भी किया और पुलिस थानेका घेराव भी किया । उन्होंने हत्याके लिए न्यायकी मांग भी की । मृतककी माताद्वारा प्राथमिकता प्रविष्ट करानेपर उस प्रेमिका लडकी व उसके भाई अरमानको बन्दी बनाया गया । दो अन्य अज्ञात अपराधियोंका सम्मिलित होने की भी आशङ्का जताई जा रही है । लडकीका पिता, जो कि भाग चुका है, उसको भी ढूंढा जा रहा है । पुलिसने शवको परीक्षणके लिए भेज दिया है । लडकेके परिजनने अपराधियोंपर कठोर कार्यवाहीकी मांग की है ।
धर्म शिक्षणके अभावमें, छोटी आयुमें बच्चोंके प्रेम प्रसंगोंमें, माता-पिता प्रसन्न होते हैं । उनको समझाने और चरित्र निर्माण करनेके लिए हस्तक्षेप न कर, उन्हें लैला मजनू बननेमें सहायता करते हैं और इस प्रकारके परिणाम प्राप्त होते हैं । अभिभावकोंको अपने बच्चोंमें ब्रह्मचर्यका चरित्र निर्माण करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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