मुस्लिम असुरक्षित अनुभव कर रहे हैं, क्‍योंकि उन्हें ज्ञात हैं कि वे ‘जिहादी’ हैं !


सितम्बर ८, २०१८

पश्चिम बंगालके आसनसोलसे भाजपा सांसद और केन्द्रीय मन्त्री बाबुल सुप्रियोने मुसलमानोंको लेकर कहा कि वे इसलिए स्वयंको असुरक्षित अनुभव करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि वे ‘जिहादी’ हैं ! ‘टाइम्स नाऊ’पर ‘हिन्दू इक्स्ट्रीमिजम’ वार्ताके समय उद्घोषकने (ऐंकरने) कहा, “एक व्यक्ति जिसका विवादित वक्तव्य देनेका इतिहास रहा है, उन्हें उत्तर प्रदेशका मुख्यमन्त्री बनाया जाता है, यह एक वास्तविकता है । एक पत्रिकामें यह बताया गया कि १९ दिसम्बर २०१३ को बलरामपुरमें एक सभामें कहते हैं कि मुसलमान आतंकवादियोंको अपना संरक्षक मानते हैं । हिन्दुओंको एकत्र होना चाहिए । इसक साथ ही उन्होंने हिन्दू राष्ट्र बनानेकी भी बात की । कैराना, लव जिहाद सहित कई प्रकरणको उठाया ।” इस पर बाबुल सुप्रियोंने कहा कि आप हमें ऐसा कोई वक्तव्य बताएं, जो उन्होंने मुख्यमन्त्री बननेके पश्चात कहा ! उनके पास नेतृत्वकी क्षमता है । उसपर कोई प्रश्न नहीं करना चाहिए । आप अपने बच्चेको अपना व्यवसाय चलानेके लिए देते हैं, क्योंकि आप उन्हें उत्तरदायी बनाना चाहते हैं । उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा, जो उनकी पद गरिमाके अनुसार नहीं है ।”

वार्ताके मध्य उद्घोषकने कहा कि निस्सन्देह, उनके वक्तव्यपर ध्यान दीजिए । उन्होनें कहा, “भारतकी समस्या कुपोषण और गरीबी नहीं है । भारतकी समस्या जिहादियोंके हितमें किया जाने वाला वोट बैंक राजनीति है । हिन्दू समाजमें सभी लोग सुरक्षित अनुभव करते हैं । सभी माताएं और बहनें सुरक्षित अनुभव करती हैं । यहां सभीकी सुरक्षा है । यहां सभी धर्मोंके लोग सुरक्षित अनुभव करते हैं; लेकिन मुसलिम क्षेत्रमें कोई सुरक्षित अनुभव क्यों नहीं करता ? यहां राष्ट्रविरोधी गतिविधियां क्यों होती है ? वे जिहादी समर्थकों और भारत विरोधी नारोंको स्थान क्यों देते हैं ?” इसपर भाजपा सांसदने कहा, “यह उचित है । मुसलमान स्वयंको असुरक्षित अनुभव करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि वे ‘जिहादी तत्व’ हैं ! वे रोहिंग्या हैं, जो कूडेमें रह रहे हैं । मैं आपको बंगालके बारेमें बता रहा हूं ।”

 

“हम सांसद महोदयकी बातका पूर्णतया समर्थन करते हैं । जो ‘वन्दे मातरम’ नहीं बोल सकता, जो मन ही मन पाकिस्तान प्रस्त है ! ऐसे धूर्त विधर्मियों, राष्ट्रद्रोहियोंको ‘जिहादी’ ही कहा जाएगा” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता



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