अपने बच्चोंमें सात्त्विक संस्कार कैसे अंकित करें ? (भाग – ४)


बच्चोंके भोजन हों सात्त्विक
धर्मशिक्षणके अभावमें आजकल अनेक माता-पिता अपने बच्चोंका पालन-पोषण योग्य प्रकारसे नहीं कर पाते और परिणामस्वरूप उनके बच्चोंको अल्प आयुसे ही अनेक प्रकारके शारीरिक और मानसिक कष्ट होने आरम्भ हो जाते हैं । मैंने आजकलके माता-पिताद्वारा आहार विषयक निम्नलिखित चूकें करते हुए देखा है –
बच्चोंको अल्प आयुसे ही शीतल-पेय (कोल्ड ड्रिंक्स) और बाहरके बने पदार्थ जैसे चिप्स, कुरकुरे, जिसमें संरक्षक तत्त्व (preservatives) रहते हैं, उसे ग्रहण करनेको देने लगते हैं ! जिस पदार्थमें ऐसे तत्त्व हों, वे तो तमोगुणी होते ही हैं, उससे बच्चोंमें तमोगुणका प्रमाण बढता है, यह सामान्यसी बात आजके माता-पिताको समझमें नहीं आती है । अन्नका मनपर अत्यधिक संस्कार पडता है, विशेषकर बालमनपर तो और भी अधिक पडता है; अतः अपने बच्चोंको बाहरके बने पदार्थ ग्रहण करनेके लिए नहीं देना चाहिए, यह बात पालकोंको विशेष रूपसे ध्यान रखनी चाहिए ।
  कई बार माताएं आलस्यवश घरमें कुछ भोजन या जलपान बनाकर नहीं देतीं और कुछ रुपए हाथमें थमा देती हैं और बच्चे बाहरके खाद्य पदार्थ लेकर ग्रहण कर लेते हैंं । आजकल अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियोंके बने भोज्य पदार्थोंमें सूअरकी वसा (चर्बी), गायकी वसा, मांस-मज्जा इत्यादि मिलना सामान्यसी बात है । आजके तथाकथित पढे लिखे माता-पिता अपने बच्चोंको लाड करनेके क्रममें उन्हें अनजानेमें विष समान बाह्य पदार्थ खानेको देते हैं ! पावरोटी (ब्रेड), ‘मैगी’, जमा हुआ खाना (फ्रोजेन फूड), ‘पिज्जा’, ‘बर्गर’ जैसे तमोगुणी आहार देकर अपने बच्चोंका तमोगुण बढा देते हैं । माता-पिताका कर्तव्य होता है कि बच्चोमें सत्त्व गुणकी वृद्धि करें, जिससे उनके जीवनमें ईश्वरीय कृपा और सुख समृद्धि बनी रहे; परन्तु तमोगुणकी वृद्धि होनेसे उनके बच्चे इन सबसे दूर हो जाएंगेंं, यह आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी पालकोंको ज्ञात नहीं है । कुछ माताएं दोसे चार वर्षके बच्चोंको फिल्मी गाने सुनाकर भोजन कराती हैं और यह बात वे बडे गर्वसे सबसे कहती हैं कि मेरा चार वर्षका बालक फलां-फलां फिल्मी नायिकाके गानेमें रुचि लेता है, आजके अनेक निर्लज्ज फिल्मी गीत देखकर तो वैश्या भी लज्जित हो जाएं, ऐसे संस्कार बालमनपर डालनेसे अल्पायुमेंं (छोटी आयुमें) ही बच्चेकी वासना जागृत हो जाती है, उनकी बाल्यावस्थाका भोलापन नष्ट हो जाता है और तमोगुणी कार्यक्रम देखकर भोजन करवानेके कारण बच्चोंको खिलाए जानेवाला भोजन विष बन जाता है !



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