बद्रीनाथ विवादपर स्थानीय लोगोंने कहा, हमें दर्शनकी अनुमति नहीं और मुसलमान पढ रहे है ‘नमाज’
२३ जुलाई, २०२१
‘बकरीद’के दिवस उत्तराखंडके श्रीबद्रीनाथ मन्दिरमें ‘नमाज’ पढे जानेकी घटनासे स्थानीय लोग आक्रोशित हैं । यह ‘नमाज’ मन्दिर परिसरसे प्राय: ७०० ‘मीटर’ दूर एक बन्द कक्षमें पढी गई ।
एक ओर जहां उत्तराखंडमें ‘भू-कानून’की मांग अधिक हो रही है, वहीं ऐसे समयमें आस्थाके धाममें ही दूसरे समुदायकी ‘घुसपैठ’ लोगोंके आक्रोशका विषय बन गई है; यद्यपि चमोली जनपद पुलिसने यह कहते हुए इस कथनसे ‘पल्ला’ झाड लिया है कि मन्दिरके भीतर नहीं; अपितु एक बन्द कक्षमें मुसलमान समुदायके श्रमिकोंद्वारा ‘नमाज’ पढी गई थी; किन्तु स्थानीय लोग इस कथनसे अधिक सन्तुष्ट नहीं दिखाई दिए ।
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) और बजरंग दलके कार्यकर्ताओंने २१ जुलाई २०२१, बुधवारको उत्तराखंडके ‘कैबिनेट’ मन्त्री सतपाल महाराजसे भेंट की और इन आरोपोंकी जांचकी मांगकी, जिनमें कहा जा रहा है कि कुछ मुसलमान श्रमिकोंने ‘ईद-उल-अदहा’पर श्रीबद्रीनाथ धाममें ‘नमाज’ की ।
पुलिसके प्रतिवादोंके (दावोंके) विपरीत स्थानीय लोग कुछ और ही कह रहे हैं । उनका कहना है कि एक ओर जहां स्थानीय लोगोंको ‘कोविड’के मध्य मन्दिरके दर्शनतक नहीं करने दिए जा रहे हैं, वहीं मुसलमान समुदायके लोग इस क्षेत्रमें ‘नमाज’ पढ रहे हैं । लोगोंका तर्क है कि श्रीबद्रीनाथ धाममें मन्दिरके ‘पूजा-अनुष्ठान’के अतिरिक्त कोई भी अन्य गतिविधि प्रतिबन्धित है ।
लोगोंका कहना है कि ‘ठेकेदार’ इस स्थानपर अपने श्रमिक लेकर आएं; परन्तु उन्हें भगवान बद्रीनाथकी परम्परा अच्छी प्रकारसे समझा दें । लोगोंका परिवाद है कि बद्रीनाथके ‘एक्ट संख्या’ १८३ में यह संकेत किया है कि धामकी पूजाके अतिरिक्त यहांपर अन्य कोई कार्य नहीं हो सकता ।
‘पुलिस’द्वारा पहले यह कहा गया था कि यह समाचार ही छद्म है; परन्तु अब स्थानीय लोगोंने शासन व पुलिसका काला सत्य उजागर किया है । यह समाचार हिन्दुओंके मुखपर थप्पड मारने जैसा है । क्या उत्तराखंड शासन इसलिए चारधामको अपने नियन्त्रणमें लेना चाहता है ? यह तो लूटके साथ-साथ षड्यन्त्र भी है । सभी धर्मनिष्ठ हिन्दुओंको इसके विरोधमें खडा होना चाहिए और हिन्दू धर्मस्थलोंकी पवित्रताकी रक्षा हेतु, वहां अन्य अवांछित तत्त्वोंका प्रवेश प्रतिबन्धित होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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