बहुतसे घरोंमें पुरोहिताईका नियोजन कर हडबडीमें पूजन कराने वाले पण्डितगण !


किसी विशिष्ट व्रत या त्यौहारके समय कुछ पण्डितगण लोभमें आकर बहुतसे घरोंमें पुरोहिताईका नियोजन कर लेते हैं और उसके पश्चात वे सभी घरोंमें पूजन कराते समय जैसे अपना कोई कार्य निपटा रहे हों, ऐसी प्रवृत्तिसे सब कुछ हडबडीमें करते और कराते हैं | आधा समय तो उनका ध्यान घडीपर रहती है ! ऐसे पण्डितोंसे विनती करना चाहेंगे कि आपका कार्य कोई सामान्य कार्य नहीं होता है जो उसे किसी भी प्रकारसे कर दिया जाए ! विशिष्ट व्रत या त्योहारके दिवस विशिष्ट देवताका तत्त्व कार्यरत रहता है; इसलिए आपकेद्वारा पूजा भावपूर्ण न करानेसे यजमानको तो हानि होती ही है, उनसे अधिक पाप आपको लगता है ! दीपावलीके समय आपमेंसे अनेकोंने यह अनुभव किया ही होगा ! वैसे ही पितृपक्षके समय भी यही स्थिति रहती है | जैसे एक बार मैंने देखा कि पांच पंडित एक यज्ञका अनुष्ठान करवा रहे थे; अनुष्ठानसे पूर्व वे पञ्चदेवताका षोडशोपचार पूजन करा रहे थे | वहां उपस्थित पण्डितोंको लगा किसीको संस्कृत आती तो होगी नहीं; और उनमें कोई समन्वय नहीं था; एक पंडित मंत्र कुछ और पढ रहे थे और दूसरे पंडित यजमानसे कर्म कुछ और करवा कर रहे थे; यह दस मिनिटतक चलता रहा; अंतत: मुझे उन्हें रोककर सब बताना पडा ! इससे मुझे लगा कि हिन्दुओंको आज संस्कृत सीखना अति आवश्यक हो गया है और पण्डितोंने भी यह ध्यान रखना चाहिए कि चाहे यजमान और वहां उपस्थित लोगोंको संस्कृत और वे अनुष्ठान निमित्त कर्म आते हो या नहीं, ईश्वरको सर्वज्ञात होता है और आप जो कर्म कर रहे हैं वह मात्र धन अर्जित करने हेतु नहीं कर रहे हैं अपितु ईश्वरकी कृपा पाने हेतु कर रहे हैं; अतः ईश्वरनिष्ठ होकर अपने सर्व कर्म करें |  



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