जून २९, २०१८
मोदी शासन ‘तीन तलाक’के बाद मुस्लिम महिलाओंके हित में दो और निर्णय लेने जा रही है । शासन ‘तीन तलाक’के बाद ‘निकाह हलाला’ और ‘बहुविवाह’को समाप्त करनेके लिए सज्ज है ।
सूत्रोंका कहना है कि शासन ‘निकाह हलाला’ और ‘बहुविवाह’को समाप्त करनेके पक्षमें हैं । यह कारण है कि ‘निकाह हलाला’ और ‘बहुविवाह’को चुनौती देनेवाली याचिकाओंके उत्तरमें अभी तक केन्द्र शासनने कोई भी याचिका नहीं की है ।
सूत्रोंका कहना है कि मोदी शासन ‘तीन तलाक’ विधेयक स्वीकृत करानेके बाद मुस्लिम महिलाओंको ‘निकाह हलाला’ और ‘बहुविवाह’की कुरीतियोंसे मचक्त करनेके लिए पग उठाएगी । केन्द्र इसके लिए विधेयक ला सकता है ।
वहीं, अभी तक ‘तीन तलाक’ विधेयक संसदमें अटका हुआ है । गत सत्रमें शासनने लोकसभामें विधेयकको स्वीकृत करा लिया था; लेकिन राज्यसभामें बहुमत नहीं होनेके कारण यह अब तक लटका हुआ है ।
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल ‘तीन तलाक’में संशोधनकी मांग कर रहे हैं, जबकि शासन इसमें किसी तरहका बदलाव नहीं करना चाहता है । मुस्लिम संगठन भी शासनके ‘तीन तलाक’ विधेयकका विरोध कर रहे हैं । इनका कहना है कि शासन उनके धार्मिक प्रकरणमें हस्तक्षेप कर रही है, जबकि इससे पूर्व उच्चतम न्यायालय भी शासनसे विधेयकपर विधान बनानेको कह चुकी है । न्यायालय यहां तक कह चुका है कि #तीन तलाक’ मुस्लिम महिलाओंके मौलिक अधिकारोंका उल्लंघन करता है ।
वहीं, इसमें शासनका कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम महिलाओंके हित में हैं । तीन तलाक मुस्लिम महिलाओंके मौलिक अधिकारोंका उल्लंघन करता है । इसका उद्देश्य धार्मिक प्रकरणमें हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि मुस्लिम महिलाओंको उनका अधिकार दिलाना है ।
स्रोत : आजतक
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