दण्ड न्यूनकर मुक्त कर दिया गया अबू बशीरको, २०० लोगोंको उडानेवाले बम धमाकेका था सूत्रधार


०९ जनवरी, २०२१
     इण्डोनेशियाने शुक्रवार, ८ जनवरीको आतड्की अबू बक्र बशीरको कारावाससे मुक्त कर दिया । वर्ष २००२ में इण्डोनेशियाके बालीमें ‘नाइट क्लब’में हुए धमाकेका वह सूत्रधार था । दो दशक पूर्व हुए उस आक्रमणमें कई विदेशियों सहित २०० लोगोंकी मृत्यु हो गई थी ।
     इण्डोनेशियाई शासनका कहना है कि ८२ वर्षके अबूका  दण्ड पूरा हो गया है; इसलिए उसे मुक्त किया गया है । इस्लामिक आतड्कवादी नेटवर्क ‘जेमाह इस्लामिया’के सबसे कट्टर लोगोंमें अबु बकर बशीरका नाम गिना जाता रहा है । कथित रूपसे उसके सम्बन्ध ‘अलकायदा’से भी है । स्वयंको अध्यापक बतानेवाला कट्टरपन्थी प्रचारक सारे आरोपोंको अनुचित बताता रहा है ।
     शुक्रवारको जकार्ताकी गुनुंग सिंदूर कारावाससे उसे वाहनमें बैठाकर मुक्त किया गया । हो सकता है कि उसे सीधे उसके गृहनगर सोलो भेजा जाए, जहां वह पुनः ‘इस्लामी शिक्षा’ देना प्रारम्भ करे । उसे वर्ष २०११ में प्रकरणकी सुनवाईके मध्य १५ वर्षका कारावासका दण्ड हुआ था ; परन्तु वर्तमानमें अधिकांश बन्दियोंके दण्डमें कटौतीके पश्चात उसका दण्ड भी कम कर दिया गया और उसे मुक्त कर दिया गया ।
          दो वर्ष पूर्व भी मानवीय आधारपर बशीरको छोडनेकी मांग उठाई गई थी; परन्तु उस समय ऑस्ट्रेलियामें हडकम्प मच गया और उसको छोडनेकी मांग टाल दी गई । बता दें कि जिस आक्रमणमें बशीर आरोपी पाया गया था, उसमें ऑस्ट्रेलियाके ८८ लोगोंकी मृत्यु हो गई थी । आक्रमणसे बचे लोग आज भी बशीरको मुक्त करनेका विरोध कर रहे हैं । ऑस्ट्रेलियाके प्रधानमन्त्रीने उसके छोडनेपर असन्तुष्टि प्रकट की है ।
          बशीरद्वारा कराए आक्रमणमें मारे गए लोगोंके परिजन इण्डोनेशियाके ‘क्लब’में हुए आक्रमणको नहीं भुला पाए हैं । उनके घावका उपचार आजतक चल रहा है । सभी पीडित चाहते हैं कि किसी प्रकारसे उन्हें न्याय मिल जाए ।
      एक बार कोई देश इस्लामके अनुसार चलने लगे तो आतङ्क वहां दोष नहीं, वरन उनका ‘धर्म’ बन जाता है । उसके पश्चात उस स्थानका सर्वनाशकर, धर्मस्थापना करना ही एकमात्र उपाय शेष रह जाता है । आनेवाले समयमें ऐसे देशोंकी यही गति होगी । साथ ही भारतके हिन्दू आज भी सचेत नहीं हुए तो यह स्थिति भारतमें भी उत्पन्न हो सकती है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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