बंगालमें भाजपा कार्यकर्ताओंकी हत्याका क्रम जारी है ! ये है आजके लोकतन्त्रका घृणित स्वरूप ! एक दलके कार्यकर्ता दूसरे दलके कार्यकर्ताओंको फूटी आंख नहीं सुहाते हैं । क्या ऐसे लोग राजनीतिमें आनेकी पात्रता रखते हैं ? और भाजपा सम्पूर्ण भारतमें अपने कार्यकर्ताओंकी हत्यापर कुछ करती क्यों नहीं है ? क्या उसकी क्षात्रवृत्ति नष्ट हो चुकी है ? जो अपने मुट्ठी भर समर्पित कार्यकर्ताओंका रक्षण नहीं कर सकती है, वह इस विशाल देशका रक्षण कैसे करेगी ?, अब हिन्दुत्ववादियोंके मनमें यह प्रश्न उत्पन्न होने लगा है । पहले दक्षिण भारतमें यह क्रूर खेल आरम्भ हुआ और अब उत्तर भारत, बंगाल आदि राज्योंमें निरन्तर होने लगा है ! समय रहते ऐसे लोगोंको कठोरतम दण्ड देना आवश्यक है अन्यथा ऐसे दुर्जनोंका साहस दण्डके अभावमें और भी बढ जाएगा ! जिस राजनीतिक पक्षके कार्यकर्ता ऐसा करते हैं उन्हें भी चुनाव और शासन करनेके अधिकारसे वंचित कर देना चाहिए अन्यथा यह मुगलई कुप्रथा एक भयंकर महारोगका रूप धारण कर लेगी लोकतन्त्रके सर्वनाशका कारण बनेगी !
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