असमकी जनसांख्यिकी स्थिति परिवर्तनका षड्यन्त्र, २०५० तक सत्तापर अधिकारका कार्य चल रहा है, सिपाझार हिंसापर बोले मुख्यमन्त्री सरमा
२ अक्टूबर, २०२१
असमके मुख्यमन्त्री हिमंता बिस्वा सरमाने राज्यकी जनसांख्यिकी स्थिति परिवर्तनके लिए रचे जा रहे षड्यन्त्रपर प्रत्याक्रमण किया है । उन्होंने कहा कि कुछ समूह २०५० तक न केवल असमकी सत्तापर आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं; अपितु २०५० तक यहांकी जनसांख्यिकी स्थितिको भी परिवर्तित करना चाहते हैं । उन्होंने दरांग जनपदके सिपाझारमें स्थित गोरुखूंटी गांवमें अतिक्रमण हटाने गई ‘पुलिस’पर आक्रमणको संज्ञानमें लेकर ये बात कही । गोरुखूंटी गांवमें जो १०,००० लोग रह रहे थे, उनमेंसे ६००० के नाम ‘एनआरसी’में प्रविष्ट नहीं हैं; यद्यपि वहांके जो स्थानीय निवासी हैं, उनके पास सारे प्रपत्र हैं ।
मुख्यमन्त्री हिमंता बिस्वा सरमाने ३० सितम्बर २०२१, गुरुवारको कहा कि सिपाझारमें हुई हिंसाके समय, जिन अतिक्रमणकारियोंने ‘पुलिस’पर आक्रमण किया था, उनमेंसे अधिकतर बाहरसे आए थे और डलगांव व बाघबोरसे आए इन लोगोंने क्षेत्रपर अपना आधिपत्य कर लिया था । बता दें कि उस आक्रमणमें ३ लोगोंकी मृत्यु हो गई थी और असम ‘पुलिस’के ११ सिपाही घायल हुए थे । उस गांवमें बंगाली बोलनेवाले मुसलमानोंकी बहुलता है ।
असमके मुख्यमन्त्रीने कहा, उनका षड्यन्त्र है कि धीरे-धीरे भूमिका अतिक्रमण किया जाए । होजाइ जनपदका लुमडिंग क्षेत्र और सोनितपुरका बरछाला भी उनके लक्ष्यमें रहा है । उन्होंने नागांवके बतदरोबापर पूर्व ही आधिपत्य कर लिया है । प्रत्येक ५ वर्षके पश्चात, कई क्षेत्रोंकी जनसांख्यिकी स्थिति परिवर्तनका षड्यन्त्र होता रहा है । प्रथम मेरी पहुंच उन कागदोंतक नहीं थी; किन्तु अब मैंने गुप्त प्रतिवेदनके साथ-साथ उन प्रपत्रोंको भी देखा है ।
भारतका असम राज्य, सदैवसे बांग्लादेशसे आनेवाले जिहादियोंके लक्ष्यपर रहा है; यद्यपि शेष पूर्वोत्तर क्षेत्रमें ईसाई ‘मिशनरी’ धर्म-परिवर्तनमें सक्रिय हैं । जिहादियोंद्वारा असममें किए जा रहा जनसांख्यिकी स्थिति परिवर्तनका प्रयास केवल असमके लिए ही नहीं; यद्यपि सम्पूर्ण भारतके लिए चिन्ताका विषय है । हिन्दुओ ! यही समय है, जब अपनी भावी पीढीके सुरक्षित भविष्यके लिए हिमंता बिस्वा सरमा जैसे लोगोंके साथ, कन्धेसे कन्धा मिलाकर कार्य किया जाए और उनको मौलिक बल प्रदान किया जाए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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