सरकारी ‘बैंकों’को २०१७ -१८ में ८५,३७० कोटि रुपयोंकी हानि, केवल दो रहे लाभ में !


जून १०, २०१८

सार्वजनिक क्षेत्रके ‘बैंकों’को २०१७-१८ में कुल मिलाकर ८५,३७० कोटि रुपयोंकी हानि हुई । सबसे अधिक हानि ‘पंजाब नेशनल बैंक’का (लगभग १२,२८३ कोटि) हुआ । ‘आईडीबीआई’ बैंक दूसरे नम्बर पर रहा । ‘बैंकों’द्वारा दिए तिमाही आंकडोंके अनुसार, वित्त वर्षके मध्य २१ में से १९ बैंक क्षतिमें रहे । ‘इण्डियन बैंक’ और ‘विजया बैंक’को छोडकर १९ सरकारी बैंकोंका कुल क्षति ८७,३५७ कोटि रही ।

‘इण्डियन बैंक’ और ‘विजया बैंक’ने २०१७-१८ में कुल मिलाकर १९८६.०१ कोटिका लाभ अंकित किया । इसमें ‘इण्डियन बैंक’को १,२५८.९९ कोटि और ‘विजया बैंक’को ७२७.०२ कोटिका लाभ हुआ । ‘इण्डियन बैंक’का यह अब तक का सबसे अधिक लाभ है । इस प्रकार सार्वजनिक क्षेत्रके ‘बैंकों’को पिछले वित्त वर्षमें कुल मिला कर ८५,३७० कोटिकी हानि हुई । २०१६-१७ के अन्तराल इन २१ ‘बैंकों’को कुल ४७३.७२ कोटिका शुद्ध लाभ हुआ था ।

१४,००० कोटिके भ्रष्टाचारका दंश झेल रहे ‘पंजाब नेशनल बैंक’को पिछले वित्त वर्षमें १२,२८२.८२ कोटिकी हानि हुई, जबकि इससे पिछले वित्त वर्षमें उसने १,३२४.८ कोटिका लाभ अर्जित किया था । ‘पीएनबी’के बाद सबसे अधिक हानि ‘आईडीबीआई’ बैंकको हुई । उसकी हानि २०१६-१७ के ५,१५८.१४ कोटि से बढकर २०१७-१८ में ८,२३७.९३ रुपये हो गई ।

देशके सबसे बडे बैंक भारतीय स्टेट बैंककी हानि २०१७-१८ में ६,५४७.४५ कोटि रही, जबकि २०१६-१७ में उसे १०,४८४.१ कोटिका शुद्ध लाभ हुआ था । वहीं, देशका बैंकिंग क्षेत्र ‘एनपीए’ और भ्रष्टाचार एवं धोखाधडीसे जूझ रहा है । दिसम्बर २०१७ तक बैंकिंग क्षेत्रका ‘एनपीए’ ८.३१ लाख कोटि रह गया । बढते डूबे ऋणके कारण बैंकोंकी वित्तीय स्थिति जर्जर है और इसके चलते २१ सार्वजनिक बैंकोंमें से ११ को रिजर्व बैंकने त्वरित सुधार कार्रवाई (पीएसए) प्रणालीके अन्तर्गत रखा है ।

वित्त मन्त्री पीयूष गोयलने ‘एनपीए’के निपटारेके लिए एक राष्ट्रीय परिसम्पत्ति पुनर्गठन कम्पनीके गठनके बारेमें सुझाव देनेके लिए विशेषज्ञोंकी समितिका गठन किया गया है । समिति १५ दिनोंके भीतर अपने सुझाव देगी ।

स्रोत : जी न्यूज



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