देहली बम विस्फोटका आरोपी आरिज मृत्युदण्डके विरुद्ध पहुंचा देहली उच्च न्यायालय बाटला ‘हाउस एनकाउंटर’में मोहनचंदको मारी थी गोली
२५ जुलाई, २०२१
देहलीके बाटला हाउस ‘एनकाउंटर’ प्रकरणमें आरोपी इंडियन मुजाहिदीनके आतड्की आरिज खानने न्यायालयके निर्णयके विरुद्ध उच्च न्यायालयमें चुनौती दी है । आरिज खानने अपने अधिवक्ता एम.एस. खानके द्वारा मृत्युदण्ड के विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट किया है । देहलीके साकेत न्यायालयने २००८ के बाटला हाउस ‘एनकाउंटर’ घटनामें सम्मिलित आतड्की आरिज खानको इसी वर्ष मार्चमें ‘आईपीसी’ की विधान १८६, ३३३, ३५३, ३०२, ३०७, १७४ ए, ३४ और ‘आर्म्स एक्ट’ के अन्तर्गत आरोपी प्रमाणित किया था ।
न्यायालयने कहा यह प्रमाणित हो चुका है कि आरिज खान और उसके सहयोगियोंने योजनापूर्ण प्रकारसे शासकीय कर्मचारियोंको हानि पहुंचाई । न्यायालयने यह भी कहा कि खानने आरक्षक मोहनचंद शर्मापर गोली चलाई जिससे उनकी मृत्यु हो गई । इस घटनामें एक आरोपित शहजाद अहमदको २०१३ को दण्ड दिया गया था । जबकि इनके २ सहयोगी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए थे । वहीं एक दशक तक लुप्त रहनेके पश्चात फरवरी २०१८ में देहली पुलिसने आरिजको बन्दी बनाया था ।
देहलीके करोल बाग, ‘कनॉट प्लेस’, ‘इंडिया गेट’ और ग्रेटर कैलाशमें हुए ‘सीरियल बम विस्फोटमें लगभग ३० व्यक्ति मारे गए थे और १३३ व्यक्ति घायल हो गए थे । पडतालमें पाया गया था कि ‘बम ब्लास्ट’को आतड्की सङ्गठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’के द्वारा किया गया था । ये आतंकी बाटला हाउसकी एक सदनिकामें भाडेपर रह रहे थे ।
जो व्यक्ति अपराधी सिद्ध हो चुका है, वह भी अपने लिए जीवनकी मांग, न्यायालयसे कर सकता हो तो अवश्य ही यह न्यायव्यवस्था विसंगतिपूर्ण है और इसे परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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