इंग्लैडके धर्महीन उद्योग ‘पिज्जा हट’का कुकृत्य, हरा रंग दिखाकर परोस दिया गौमांसवाला पिज्जा !


फरवरी २२, २०१९


भारतीय मूलके एक शाकाहारी व्यक्तिको पिज्जा कम्पनीने ‘बीफ पिज्जा’ परोस दिया । चूकसे उस व्यक्तिने पिज्जाका एक निवाला खानेके पश्चात कर्मियोंको खरी-खोटी सुनाई । प्रकरण इंग्लैंडके मिडलैंड क्षेत्रका है । अभिषेक भारतीय नामके व्यक्ति अपनी पत्नी प्रेरणा गोयलके साथ नॉटिंघमके ‘पिज्जा हट’ गए थे । वहां जानेके पश्चात उन्होंने चुनाव किया, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी पिज्जा दोनों सम्मिलित थे । कर्मचारीने बताया कि हरे रंगवाला पिज्जा शाकाहारी हैं; परन्तु ऐसा हुआ नहीं और उन्हीं पिज्जामें मांसाहारी पिज्जा भी था । इसपर अभिषेकने कहा कि मैंने अपने जीवनमें अबतक मांस नहीं खाया था; परन्तु इस घटनाके पश्चात मुझे बुरा लग रहा है । मेरे धर्ममें गौमांस खानेकी मनाही है और हम गायकी पूजा करते हैं । इस घटनाके पश्चात अभिषेक और उनकी पत्नीने कहा कि हमें बहुत बुरा लग रहा है, हम पुनः कभी यहां भोजन करने नहीं आएंगें । भारतीयने कहा कि मुझे अनुसार है कि चूकसे यह पैकेट इसमें मिल गया होगा; परन्तु कर्मीने पूरे आत्मविश्वासके साथ कहा कि सभी हरे रंगवाले पिज्जा शाकाहारी हैं ।

वहीं ‘पिज्जा हट’के प्रवक्ताने कहा कि मुझे इस घटनाके बारेमें ज्ञात हुआ तो मुझे अच्छा नहीं लगा । असुविधाके लिए मुझे दुःख है । हम शाकाहारी और मांसाहारी पिज्जाको पृथक करके रखते हैं और रंग बिरंगे कागदके प्रयोगसे चिन्हित भी करते हैं । इस बार जाने कैसे यह घटना हो गई ?

 

“लालची और निधर्मी भोज्य पदार्थके कुछ उद्योग भारतमें भी सभी पदार्थ शाकाहार बताकर मांसाहार ही विक्रय करते हैं तो इंग्लैंड जैसे तमस प्रधान संस्कृतिके उद्योगोंसे यह अपेक्षा कैसे की जा सकती है ? हास्यास्पद है कि पिज्जा जोकि तामसिक, अभक्ष्य व पहलेसे ही मांसाहारी है; क्योंकि उनमें पहलेसे ही ‘इनहैंसर ई-६३५,६५१’ आदि मिलाए गए होते हैं, जोकि मांसाहारी हैं, अभिषेक उनमें हरे और लाल रंगके नाटकसे अपना शाकाहार व मांसाहार निर्धारित कर रहे हैं । जो उच्छिष्ट भोजन पिज्जा भारतमें भी शाकाहारी नहीं परोसा जाता, जिसे सभी हिन्दू आनन्द लेकर खाते हैं, वह उन्हें इंग्लैंडमें कैसे मिलेगा ? हिन्दुओ ! नियम पालन हेतु पुरुषार्थ करना पडता है, ‘रेस्टोरेंट’में जाकर लाल और हरा रंग देखनेसे नियम पालन नहीं होता है और भोजनका हिन्दू धर्ममें अत्यधिक महत्त्व है, जिसे आप सभी आलस्यके कारण लगभग नष्ट कर चुके हैं, जिसका परिणाम यह हुआ है कि बाजरेकी रोटी और लस्सी पीकर पाषाण जैसी देहका हिन्दू आज प्लास्टिक देहका होकर रोगी हो चला है ।- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता

 



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