बंगालमें गोत्र आक्षेप, तृणमूल सांसद महुआ मोइत्राके ‘चोटीवाले राक्षस’पर बोले गिरिराज, धोते रहिए रोहिंग्याके पांव


३१ मार्च, २०२१
     नंदीग्राममें मंगलवारको ममता बनर्जीने बताया कि चुनाव प्रचारके मध्य वे एक मन्दिरमें गईं तो पुजारीने उनका गोत्र पूछा और उन्होंने अपना गोत्र ‘मां-माटी-मानुष’ बताया । ‘रैली’में ममता बनर्जीने कहा कि उनका गोत्र ‘शाण्डिल्य’ है; किन्तु वो अपना गोत्र ‘मां-माटी-मानुष’ बताती हैं ।
     ममताको उत्तर देते हुए गिरिराज सिंहने पूछा था कि क्या रोहिंग्या और घुसपैठियोंका भी गोत्र शाण्डिल्य है ? उन्होंने ‘ट्वीट’कर कहा था, “रोहिंग्याको चुनावके लिए बसानेवाले, दुर्गा-काली पूजा रोकनेवाले, हिन्दुओंको अपमानित करनेवाले, अब पराजयके भयसे गोत्रपर उतर गए । ‘शाण्डिल्य गोत्र’ सनातन और राष्ट्रके लिए समर्पित है, चुनावके लिए नहीं ।”
      इसके उत्तरमें महुआ मोइत्राने ‘ट्वीट’ किया, “केन्द्रीय मन्त्री गिरिराज सिंह कहते हैं कि ममताका गोत्र रोहिंग्याओंका है । हमें इसपर गर्व है । ये चोटीवाले राक्षस गोत्रसे तो कहीं अधिक अच्छा है ।”
     अब इसका उत्तर देते हुए गिरिराजने ‘ट्वीट’ किया है, “शिखा हिन्दुस्तानकी सनातन सभ्यता और संस्कृतिका अभिन्न अंग रही है और चुनावके लिए सनातनको अपशब्द बोलना उचित नहीं है । रोहिंग्याके पांव धोते रहिए; शीघ्र ही भारत उत्तर मांगेगा ।”
      बंगालके नंदीग्राममें दूसरे चरणमें ३० विधानसभा ‘सीटों’पर १ अप्रैलको मत डाले जाएंगे । यहां ममता बनर्जी और भाजपाके शुभेंदु अधिकारीके मध्य आमना-सामना है ।
   राजनीतिक रोटियां सेंकने हेतु ऐसे राष्ट्रद्रोही भारतको इस्लामिक राष्ट्र बनाने हेतु अनेक प्रयास करेंगे । इन्हें ‘शिखा’ और ‘यज्ञोपवीत’में राक्षस दिखता है, इससे ज्ञात होता है कि इनकी वंश परम्परामें धर्मका महत्त्व नहीं सिखाया गया है अथवा लोप हो गया है । यही आज भारतकी दुःखद स्थिति है । हिन्दू होते हुए भी ऐसे निधर्मी व कलङ्क स्वरूप लोग धर्मका अनादर करते हैं । ऐसे लोग शासन तो दूर, वरन कठोर दण्डके पात्र हैं ! ऐसे लोगोंको अब गोत्र एवं शिखाका महत्त्व हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके पश्चात ही राष्ट्रद्रोहियोंको सिखाया जा सकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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