बंगाल : मतगणनाके दिन भाजपा कार्यकर्ताओंकी नृशंस हत्या, ‘एसआईटी’ तथा ‘सीबीआई’से जांचकी मांग
१९ मई, २०२१
पश्चिम बंगालमें २ मई २०२१ को चुनावके परिणामोंमें तृणमूल कांग्रेसकी विजय सुनिश्चित होते ही हिंसाका ताण्डव प्रारम्भ हो गया । अभिजीत सरकार तथा हारन अधिकारी सहित अनेक भाजपा समर्थकोंकी नृशंस हत्याकी गई । अभिजीत सरकारकी पत्नी तथा माताके समक्ष उनके गलेको ‘सीसीटीवी’की तार लपेटकर गला दबा दिया गया । उनकी माताजी यह देखकर मूर्छित हो गईं ।
सरकारके शवका अभीतक दाह संस्कार नहीं किया गया है । याचिकाकर्ताओंके अधिवक्ताने न्यायालयसे याचना की है कि उनके शवके ‘पोस्टमॉर्टम’का दृश्यपट बनाया जाए । ज्ञातव्य है कि बंगाल चुनाव हिंसासे लगभग ३५०० गांव प्रभावित हुए हैं । अधिकतर अनुसूचित जाति, जनजातिके हिन्दू पीडित हैं, जिनकी सङ्ख्या ४०००० से अधिक है । महिलाओंसे भी हिंसा और उनपर अत्याचार किए गए । मछली व्यवसायियोंके ‘तालाबों’में विष डाल दिया गया, उनके आधार’कार्ड’ चुनाव परिचयपत्र छीन लिए गए थे । आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही ।
बंगाल हिंसाकी जनयाचिकापर कोलकाता उच्च न्यायालयने कहा कि हिंसाके पीडित मानवाधिकार आयोग तथा महिला आयोग जैसी संस्थाओंमें भी परिवाद कर सकते हैं ।
न्यायालय मानवाधिकार आयोगमें जानेका परामर्श दे रहा है, जबकि समय-समयपर यही न्यायालय स्वतः संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करते रहते हैं; परन्तु बंगालकी हिंसापर स्वतः संज्ञान लेने और निर्णय देनेका साहस न्यायालयोंको नहीं हो रहा है, इससे स्पष्ट है कि यहांके न्यायाधीश भयभीत हैं; अतः ममता बनर्जी शासनको पदच्युत करनेके अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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