धर्मनिरपेक्षताके रोगसे पीडित मन्त्रीने कहा, गीता धार्मिक ग्रन्थ नहीं है !


सितम्बर १, २०१८

महाराष्ट्रके शिक्षा मन्त्री विनोद तावडेने शनिवारको कहा कि भगवद् गीता कोई धार्मिक ग्रन्थ नहीं, बल्कि ‘जीवन जीनेका एक तरीका’ है और शैक्षणिक संस्थानोंमें इसके वितरणमें कुछ भी साम्प्रदायिक नहीं है । तावडेने कहा कि अन्य धर्मोंके पवित्र ग्रन्थोंकी प्रतियां भी महाविद्यालयमें दी जा सकती हैं, उन्हें नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा सकता है ।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज यदि कोई शैक्षिक संस्थानोंमें गीताका वितरण करनेके बारेमें सोचता भी है तो इस पगको शैक्षिक संस्थानोंका भगवाकरण करनेके भाजपाके प्रयासोंके रुपमें देखा जाता है । तावडेने इसके लिए समाचार माध्यमोंको उत्तरदायी बताया ।

दक्षिण मुम्बईके गिरगांवमें ‘भक्तिवेदान्त विद्यापीठ शोध केन्द्र’के उद्घाटनके अवसरपर तावडेने कहा, ‘‘आज भगवद् गीताका वितरण करनेका अर्थ साम्प्रदायिक है ! हम कब इस मानसिकतासे बाहर निकलेंगे ? पहली कक्षाके बच्चेको भी गीताके द्वारा जीवनके विभिन्न आयामोंके बारेमें पढाया जा सकता है । गीता, वेद और उपनिषद् धार्मिक ग्रन्थ नहीं, बल्कि दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रकृतिके ग्रन्थ हैं । इन्हें केवल मन्दिरों तक सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि जीवन जीनेके एक राहके रूपमें साधारण जन तक भी पहुंचाना चाहिए । यदि कुरान और बाइबिलकी प्रतियां नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं तो उन्हें भी महाविद्यालयोंमें वितरित किया जाएगा ।’’

इस वर्ष जुलाईमें मुम्बई क्षेत्रके संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा कार्यालयने एक पत्र जारी कर नगरमें एनएएसी ‘ए’ और ‘ए+’ श्रेणी वाले महाविद्यालयोंसे उनके कार्यालयसे गीताकी प्रतियां एकत्रित करनेके लिए कहा था । यद्यपि पत्रमें यह वर्णन नहीं था कि किस समूह या संगठनने वितरणके लिए प्रतियां दी थीं । इस पगसे विवाद पैदा हो गया था । विपक्षी दल कांग्रेसने इसे शैक्षिक व्यवस्थाका ‘भगवाकरण’ करनेका प्रयास बताया ।

तावडेने कहा कि जब भिवण्डीका ‘भक्तिवेदान्त ट्रस्ट’ महाविद्यालयमें गीताकी प्रतियां वितरित करना चाहता था तो उन्होंने उससे कहा था कि शासन स्वयंसे ऐसा नहीं कर सकती; लेकिन वे उन महाविद्यालयकी सूची दे सकती है, जिन्हें गीताकी प्रतियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं । उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अधिकारियोंसे उनकी (ट्रस्ट) सहायता करनेके लिए कहा; लेकिन गीता भक्त स्वयं महाविद्यालय गए और प्रतियां वितरित कीं ।’’

 

“धर्म विशेषत: जब ‘हिन्दू धर्म’की बात आती है तो कोई भी नेता सीधा एवं स्पष्ट क्यों नहीं बोल पाता ? गीता एक पूर्णत: विज्ञान एवं विज्ञानके परेय, ज्ञान देने वाला हिन्दू धर्मका ग्रन्थ है, जो न आतंकवादी तैयार करता है और न ही धर्मपरिवर्तनकी शिक्षा देता है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ 

 

स्रोत : अमर उजाला



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