उत्तर : भगवान हमें दुःख नहीं देते | हमें दुःख हमारे संचित या प्रारब्धमें एकत्रित कर्मफलके कारण मिलता है या योग्य प्रकारसे धर्माचरण न करनेके कारण ! दुःखका होना एक प्रकारसे वरदान होता है क्योंकि यह हमें अंतर्मुख करता है और जिस प्रकार सोना तपकर कुन्दन बनता है उसी प्रकार दुःख हमें सुखकी अपेक्षा अधिक सिखाता है | – तनुजा ठाकुर
Leave a Reply