जून २०, २०१८
भाजपाने जम्मू-कश्मीरमें महबूबा शासनसे समर्थन वापस लेनेका निर्णय लिया है । अध्यक्ष अमित शाहके साथ हुई अन्तरिम दलकी बैठकके बाद यह निर्णय लिया गया है । इसके बाद महबूबा मुफ्तीने भी अपने पदसे त्याग-पत्र दे दिया है और शाम चार बजे ‘पीडीपी’की बैठक बुलाई है । इससे पूर्व भाजपा बैठकके बाद समाचार माध्यमोंसे वार्तामें दलके महासचिव राम माधवने कहा कि जम्मू-कश्मीरकी वर्तमान स्थितिपर चर्चा हुई, उसके बाद दलने यह निर्णय लिया । बैठक से पूर्व अमित शाहने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभालके साथ बैठक की ।
राम माधवने कहा कि वर्तमान स्थितिके बाद गठबन्धनमें कार्य करना दलके लिए दुष्कर हो गया था; यद्यपि भाजपा सदैव ही शान्तिके लिए प्रयासरत रही; लेकिन विभिन्न कारणोंसे जम्मू-कश्मीरका शासन नहीं कर पाई । जिस तरह घाटीमें एकाएक घटनाएं बढी है, उससे राज्यकी स्थिति और बिगड गई । राम माधवने कहा कि जम्मूमें शान्तिके लिए दलने गठबन्न किया था । मोदी शासनने हर सम्भव राज्यके लिए सहायता की; लेकिन फिर भी स्थिति नहीं सुधर रही थी ।
राम माधवने कहा कि पिछली बार जो जनादेश आया था, तब ऐसी परिस्थितियां थी, जिसके कारण ये गठबन्धन हुआ था; लेकिन जो परिस्थितियां बनती जा रही थीं, उससे गठबन्धधमें आगे चलना कठिन हो गया था । राममाधवने कहा कि जिन सूत्रोंपर सरकार बनी थी, उन सभी बातोंपर चर्चा हुई । गत कुछ दिवसोंसे कश्मीरमें स्थिति काफी भयावह है, जिसके कारण हमें ये निर्णय लेना पड रहा है ।
उन्होंने कहा कि इस सम्बन्धमें प्रधानमन्त्री, अमित शाह, राज्य नेतृत्व सभीसे वार्ता की है । इस गठबन्धनको तोडनेेका कारण ‘पीडीपी’को बताया और कहा कि महबूबा परिस्थिति सम्भाल नहीं पाईं ।
बता दें कि जम्मू कश्मीरमें विधानसभाकी कुल ८९ क्षेत्र हैं, जिनमें बहुमत संख्या ४४ है । गत मतदानमें ‘पीडीपी’ २८ क्षेत्र व भाजपा २५ से विजयी हुई । दोनों मिलकर सत्तामें आए थे ।
स्रोत : अमर उजाला
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