‘भक्ति करे कोई सूरमा’ अर्थात भक्ति करना यद्यपि अत्यंत सरल साधना मार्ग है तथापि प्रत्येक यह नहीं कर सकता; अतः कबीर दासजी ने कहा है कि कोई सूरमा अर्थात क्षात्रवीर ही भक्ति कर सकता है, जिस प्रकार सोना अग्निमें तपकर कुंदन बनता है, वैसे ही जीवनकी प्रतिकूल परिस्थितियां, भक्तके भक्तिकी खरी कसौटी होती है । – तनुजा ठाकुर
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