भक्तियोग कलियुगकी योग्य साधना क्यों ? (भाग – १)


तमोगुणी वृत्तिके लिए भक्तियोग सरल मार्ग है ।
अधिकांश कलियुगी जीव मूलतः तमोगुणी होते हैं, ऐसेमें ज्ञानयोग, कर्मयोग, ध्यानयोग, क्रियायोग इत्यादिकी साधना करना उनके लिए कठिन होता है । भक्तियोग कलियुगी जीवके लिए सरल योगमार्ग है; क्योंकि तमोगुणी वृत्तिके व्यक्ति भी इस मार्गका अनुसरणकर साधना कर सकता है । इसके विपरीत ज्ञानयोगकी साधना करनेके लिए उच्च आध्यात्मिक स्तर (कमसे कम ६५ %), तीक्ष्ण बुद्धि और सूक्ष्म ज्ञानका होना आवश्यक है । कर्मयोगके लिए निष्काम, अकर्तापनयुक्त कर्म करना होता है । तमोगुणकी प्रबलता होनेके कारण, धैर्य रखकर, अनेक वर्ष चित्त वृत्तियोंका निरोधकर ध्यानस्थ रहना भी कठिन होता है; अतः कलियुगमें भक्तियोग और इसके अन्तर्गत नामसंकीर्तनयोग सहज साधना है ।



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