अगस्त २, २०१८
अमेरिकाके प्रमुख समाचार-पत्र ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’का (एनवाईटी) कहना है कि भारतीय सेनाके कारण कश्मीरमें आतंकवादकी कमर टूट चुकी है ! यहां आतंकी घटनाओंमें अब कमी देखी जा रही है और आतंकी संगठन भी कम हो गए हैं ! माना जा रहा है कि भारतके दबावमें पाकिस्तान अब आतंकियोंकी पहले जैसी सहायता नहीं कर पा रहा । कश्मीर घाटीमें अब २५० आतंकी ही बचे हैं ! इनकी संख्या २० वर्ष पूर्व १००० से अधिक होती थी ! सुरक्षा बलोंके अभियानका यह परिणाम है कि अब अधिकतर आतंकी कश्मीरमें दो वर्षसे अधिक जीवित नहीं रह पाते । कश्मीर विश्वविद्यालयमें समाजशास्त्रके पूर्व प्राध्यापक रफी बटको उसके आतंकी बननेके पश्चात ४० घण्टेके भीतर मार दिया गया !
न्यूयॉर्क टाइम्सने ‘कश्मीर वॉर गेट्स स्मालर, डर्टियर एण्ड मोर इण्टिमेट’ शीर्षकसे दिए विवरणमें लिखा, ‘‘पाकिस्तानमें हुए राजनीतिक बदलावका प्रभाव कश्मीरपर अवश्य पडेगा । यहां लडाई आदि अल्प होंगी; लेकिन रक्तपात बढनेकी आशंका भी रहेगी । कश्मीर घाटीमें सेनाके ढाई लाखसे अधिक जवान, सीमा सुरक्षा बल और पुलिसकर्मी तैनात हैं ।’’
‘एनवाईटी’ने सैन्य अधिकारियोंके माध्यमसे लिखा- अधिकतर आतंकी स्वचालित शस्त्रोंसे मारे जा रहे हैं । अभी २५० आतंकियोंमें ५० से अधिक पाकिस्तानसे आए हैं ! शेष स्थानीय निवासी हैं, जिन्होंने अब तक घाटी नहीं छोडी । पुलिसकी मानें तो १९९० में कश्मीरी युवा सीमा पार करके सरलतासे पाकिस्तान चले जाते थे । अब ऐसा नहीं है । आतंकियोंको अब गोलाबारीके प्रशिक्षणका स्थान भी नहीं मिल रहा ।
विवरणके अनुसार, “‘कश्मीर भारत और पाकिस्तानके मध्य १९४७ से चल रहा क्षेत्रीय विवाद है, यद्यपि अब यह स्वयं समाप्त होता दिख रहा है । काफी वर्ष पूर्व पाकिस्तानने कश्मीरमें अस्थिरता लानेके लिए सहस्त्रों आतंकियोंको भेजा । इसके लिए काफी रक्तपात हुआ । दोनों देशोंके मध्य तीन बार युद्ध हुए, जिनमें सहस्त्रों लोग मारे गए ! कश्मीर इस समय भी एशियाका सबसे संकटग्रस्त भाग है ।’’
स्रोत : दैनिक भास्कर
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