आजकी पत्रकारिताद्वारा किया जा रहा है व्यापक स्तरपर हिन्दी भाषाका विकृतीकरण


हिन्दुओ ! हम आपके समक्ष कुछ दिवसों हिन्दी समाचार पत्रों या जालस्थानोंके सामयिक समाचारके अंशकी कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कर रहे हैं और इस माध्यमसे यह बतानेका प्रयास कर रहे हैं कि आप स्वयं देखें कि इन सभी ‘बुद्धिजीवी पत्रकारों’ने किस प्रकार भारतमें हिन्दी भाषाके ‘विकृतिकरण’का उत्तरदायित्व ले रखा है ।
आपसे अनुरोध है कि आप संस्कृतनिष्ठ हिन्दीके प्रचार-प्रसारमें हमारा सहयोग दें अन्यथा ये सभी ‘बुद्धिजीवी’ मिलकर संस्कृत समान हिन्दी भाषाको भी लुप्तप्राय बना देंगे । हिन्दी भाषाको अशुद्ध एवं विकृत स्वरुप देनेवाली पत्रकारिताके इस घृणित स्वरूपको समाजके समक्ष निष्पक्ष होकर प्रस्तुत कर इसमें अपेक्षित सुधार लाना हमारा उद्देश्य है । आज hindi.cobrapost.com जालस्थानसे उद्धृत एक समाचारके कुछ अंश आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं । किसी भी पत्रकार या नियतकालिकके विरुद्ध हमारा वैयक्तिक स्तरपर किसी भी प्रकारका वैचारिक मतभेद नहीं है, यह आपको विशेष रूपसे स्पष्ट करना चाहेंगे ।
प्रत्येक वाक्यमें हिन्दी भाषाके हनन हेतु उर्दू या आंग्ल भाषाके शब्दोंका उपयोग किसप्रकार किया जा रहा है, उसका आपको उदाहरण प्रस्तुत करनेका मात्र एक प्रयास कर रहे हैं । अवैदिक शब्दोंको ‘ ‘को चिह्नित किया गया है एवं सभीको इन शब्दोंके उचित वैदिक शब्द ज्ञात हो इसे हेतु उसके साथ संस्कृतनिष्ठ शब्द कोष्ठक( )में दिए गए हैं । – वैदिक उपासना पीठ
‘पाक अधिकृत कश्मीर’ किसी के बाप का नहीं, कोई उसे हिंदुस्तानमें नहीं मिला सकता-फारूख अब्दुल्ला
अब तक आपने ‘हर’ (प्रत्येक) हिंदुस्तानी और देशभक्तके ‘मुँह’ (मुख) से यही सुना होगा कि पीओके भारतका हिस्सा (भाग, अंश) है, इसे हम लेकर रहेंगे, हर हिंदुस्तानी ये कहता है, हर राजनेता यही कहता है, पीओके पर कोई ‘समझौता’ (सन्धि) नहीं। ‘लेकिन’ (परन्तु) आज देश के ही एक राजनेता की ‘जुबां’ (जीभ, जिह्वा) से कश्मीरको लेकर विवादित ‘बयान’ (वक्तव्य) सामने आए। फारूख अब्दुल्लाने कहा कि ये सिर्फ खोखली और ‘ख्वाबों’ (स्वप्नों, काल्पनिक) की बाते हैं…किसी में ‘दम’ (शक्ति, बल)नहीं है जो ‘पीओके’ (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीरको भारतमेंं मिला सके । फारूख अब्दुल्लाने ‘साफ’ (स्पष्ट) कहा है कि किसी के ‘बाप’ में ‘दम’ नहीं जो पाकिस्तानसे ‘पीओके’ ले सके।



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