उत्तिष्ठ कौन्तेय !


भोग-विलासका त्याग कर जनताकी सेवा हेतु तत्पर,योगी आदित्यनाथ हैं आजके आदर्श मुख्यमंत्री
सामान्य मंचकपर (तख्तपर) सोनेवाले उत्तरप्रदेशके तेजस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथने दो नूतन ‘मर्सीडीज’ वाहन लेना अमान्य कर दिया है और कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री पांच वर्ष पुरानी गाड़ीका उपयोग करनेमें उन्हें कोई कठिनाई नहीं है |
यह जानकारी राज्य सम्पत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्लने देते हुए कहा कि दो नूतन वाहन क्रय करनेका प्रस्ताव योगीजीको भेजा गया था जिसे उन्होंने निरस्त कर दिया | इससे पूर्व भी कैबिनेट मंत्रियोंके लिए ३० लाखसे अधिक मूल्यकी ‘फार्च्यूनर’ क्रय करने हेतु वे राज्य सम्पत्ति विभागको निषेध कर चुके हैं और उसके स्थानपर उन्होंने अपेक्षाकृत न्यून मूल्यवाले वाहन ‘इनोवा’ क्रय करने हेतु निर्देश दिए हैं | उन्होंने अधिकारियोंसे कहा है जनताकी गाढ़ी कमाई मंत्रियोंको अपने भोग – विलासके लिए उपयोग नहीं करना चाहिए |
आर्य चाणक्यने लिखा है ‘राष्ट्रस्य मूल: इन्द्रियनिग्रहः अर्थात् राज्य करनेका खरा अधिकारी वह है जो अपनी इन्द्रियोंका निग्रह कर चुका हो ! योगीजी, आर्य चाणक्यके इस वाक्यको स्वंय तो चरितार्थ कर ही रहे हैं, भोग- विलासमें डूबे मंत्रियोंको भी यह पाठ पढा रहे हैं | उनकी इस त्यागमय वृत्तिका हम अभिनंदन करते हैं | यदि प्रत्येक राज्यका मुखिया ऐसा ही हो जाए तो हिन्दू राष्ट्र आनेमें कहाँ समय लगेगा ! (४.७.२०१७)



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