बिना आमन्त्रित किए मचाया समारोहमें उत्पात, समझाए जानेपर मोहम्मद लाडलाने की निर्मम हत्या


१६ सितम्बर, २०२१
      बिहारके पूर्णिया जनपदमें तीन दिवसके भीतर चार हत्याओंसे व्यापक आक्रोश उत्पन्न हो गया है । १३ सितम्बरको एक निजी बैंक कर्मचारी सन्नी सिन्हाकी उनके पडोसीद्वारा की गई जघन्य हत्यासे राज्यमें वैधानिक व्यवस्थाकी स्थिति प्रश्नचिह्नके घेरेमें है ।
     सिन्हाके परिवारद्वारा घरपर आयोजित एक समारोहके मध्य, मदमें (नशे)धुत्त, मोहम्मद लाडला अपने मित्र मोहम्मद लालके साथ बिन बुलाए आ धमका । इसके पश्चात दोनोंने ‘सिगरेट’ पीना आरम्भ कर दिया । घरवालोंद्वारा विरोधकर बाहर निकालनेसे बौखलाया मोहम्मद लाडला २० से २५ उपद्रवियोंके साथ लौटकर आया । सन्नी सिन्हाके विरोध करनेपर लाडलाको समझाने गए, इस मध्य उनकी छातीमें निर्ममतापूर्वक वार कर दिया गया । सिन्हाकी हत्याकर लाडला और उसका गुट त्वरित भाग गया । कथित रूपसे सिन्हाकी हत्यासे पूर्व, स्थानीय लोगोंने लाडला और उसके गुटद्वारा किए गए उपद्रवके विषयमें स्थानीय ‘पुलिस’को सचेत कर दिया था; किन्तु मदमें चूर पाए गए लाडलाको बन्दी बनानेके स्थानपर ‘पुलिस’ने उसे चेतावनी देकर जाने दिया ।
       घटनासे आक्रोशित स्थानीय लोगोंने कहा कि सिन्हाकी हत्या इसलिए की गई; क्योंकि ‘पुलिस’ने समयपर उचित कार्यवाही नहीं की । उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘पुलिस’ संरक्षणमें जनपदमें व्यापक रूपसे मादक पदार्थोंका विक्रय किया जा रहा है । नगरमें सार्वजनिक स्तरपर पुलिसके संरक्षणमें मादक पदार्थोंका व्यापार चल रहा है । पुलिस अवैध उगाही करनेमें लगी रहती है । वहीं एक अन्य प्रकरणमें मधुबनीमें कथितरूपसे मदकी मादकतामें, एक कुपुत्रने अपने पिताकी पीट-पीटकर हत्या की । पुलिस और स्थानीय प्रशासनके विरुद्ध आक्रोशमें वृद्धि हो रही है ।
        जहां शासनकर्ता विवेकबलके स्थानपर दुर्बुद्धि व बाहुबलको प्रधान रख शासन करते आएं हो, ऐसे दुःशासनमें प्रशासनकर्ताओंसे लेकर प्रजाका अपराधीकरण होना स्वाभाविक है, इसी कारण अपराधी विशेषतः जिहादी सार्वजनिक रूपसे हत्याकाण्ड कर रहे हैं । समाजको अपराधमुक्त एवं व्यासनमुक्त बनानेके लिए प्रत्येकको साधना, धर्माचरण एवं हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए कृतिशील होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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