विवादोंमें घिरे ‘कैथलिक बिशप’, गोपनीय पत्र लिखकर गिरिजाघर समर्थक प्रत्याशीको कहा ‘टिकट’ देनेको 


२५ जनवरी, २०२१
    केरलके ‘कैथोलिक बिशप’ राज्यके सत्ताधारी भारतीय कम्युनिस्ट दलको गोपनीय पत्र लिखकर गिरिजाघर समर्थित प्रत्याशीको ‘टिकट’ देनेकी बात  लिखनेपर विवादोंमें घिर गए हैं । प्रतिवेदनके अनुसार, ‘बिशप’ जैकब मनथोदाथने ११ जनवरीको ‘सीपीआई’ दलके राज्य सचिव कनम राजेन्द्रको एक गोपनीय पत्र लिखकर इस्सक वर्गीज नामक कैथोलिक उद्योगपतिको आनेवाले विधानसभा चुनावोंमें अपने दलकी ओरसे नामांकन करने हेतु कहा । पत्रमें ‘कैथोलिक बिशप’ने राजनेताको यह भी आश्वासन दिया कि यदि वर्गीजको पलक्कड जनपदके मन्नारक्कड निर्वाचन क्षेत्रसे नामाङ्कित किया जाता है तो ईसाई अवश्य ही ‘कम्युनिस्ट पार्टी’का समर्थन करेंगे । अब इस पत्रके ‘मीडिया’में उजागर होनेके पश्चात विवाद उत्पन्न हो गया है । लोगोंने गिरिजाघर और बिशपके राजनीतिक झुकावपर प्रश्न करना आरम्भ कर दिया है । कांग्रेस समर्थक मैथ्यू जेवियरने अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि बिशपको भी अपने राजनीतिक दल चुननेका अधिकार है; परन्तु राजनीतिक दलके ‘टिकट’के लिए किसीकी स्तुति करना अयोग्य है । वहीं केरल ‘कैथोलिक बिशप काउंसिल’के उप सचिव फादर जैकब पालकप्पिलीने विवादसे स्वयंको पृथक करते हुए कहा है कि ‘चर्च’ सभी राजनीतिक दलोंसे पर्याप्त दूरी बनाए रखता है व चिरकालसे इस बातपर अडिग है । उनके अनुसार, जैकबकी टिप्पणी उनका निजी विचार है । उल्लेखनीय है कि १४० सदस्योंवाले केरल विधानसभाके आगामी चुनावसे पूर्व अनेक राजनीतिक दल अपने ‘वोट बैंक’में वृद्धि करने हेतु जातीय नेताओंसे सम्पर्क कर रहे हैं । ऐसेमें ‘कैथोलिक बिशप’का यह पत्र इसी प्रकरणके साक्ष्य रूपमें प्रस्तुत होता है ।

        चुनावोंके मध्य किस प्रकारके निम्न स्तरीय राजनीतिक षड्यन्त्र विजय प्राप्त करने हेतु स्थानीय दलोंद्वारा किए जाते हैं, यह समाचार इसीकी सूचना देता है । अब केरलके सभी हिन्दुओंको भी सङ्गठित होकर हिन्दू हितोंमें कार्य करनेवाले राजनीतिक दलका ही समर्थन करना चाहिए, जिससे गत वर्षों समान उन्हें पुनः आनेवाले कालमें उत्पीडन न सहना पडे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ

स्रोत : ऑप इंडिया



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