शक्ति मिल सामूहिक दुष्कर्म प्रकरणमें (केसमें) दोषी सलीम, कासिम व विजयको मिलनेवाला मृत्युदण्ड निरस्त, बॉम्बे उच्च न्यायालयने पलटा सत्र न्यायालयका (सेशन कोर्टका) निर्णय
२५ नवम्बर, २०२१
२२ अगस्त २०१३ को मुंबईके ‘शक्ति मिल कम्पाउण्ड’में महिला छायांकन पत्रकारके साथ हुए दुष्कर्ममें मुंबई उच्च न्यायालयने तीन आरोपितोंकी मृत्युदण्डको आजीवन कारावासमें परिवर्तित कर दिया है । पूर्वमें सत्र न्यायालयने (सेशन कोर्टने) तीन आरोपितोंको मृत्युदण्ड और एक अन्यको आजीवन कारावासका दण्ड सुनाया था । तीनों आरोपितोंके सत्र न्यायालयके निर्णयके विरुद्ध उच्च न्यायालयमें याचना की थी । इस प्रकरणमें मोहम्मद सलीम, मोहम्मद कासिम हाफिज शेख अर्थात कासिम बंगाली व विजय मोहन जाधवको मृत्युदण्ड मिला था । इसी अपराधमें सिराज रहमान खानको आजीवन कारावासका दण्ड मिला था । एक अन्य आरोपित चांद बाबू अपराधके समय अवयस्क था ।
‘शक्ति मिल कम्पाउण्ड’ प्रकरणमें १९ सितम्बर २०१३ को मुंबई अपराध जांच विभागने (क्राइम ब्रांचने) न्यायालयमें आरोपितोंके विरुद्ध लगभग ६०० पृष्ठोंके आरोप-पत्र (चार्जशीट) प्रविष्ट किया । इस प्रकरणका परीक्षण (ट्रायल) १४ अक्टूबर २०१३ को आरम्भ हुआ । इस मध्य पीडिता और साक्षीने (गवाहने) आरोपितोंका न्यायालयमें जाकर अभिज्ञान (पहचाना) किया था । ४ अप्रैल २०१४ को मुंबई सत्र न्यायालयने तीन आरोपितोंको मृत्युदण्ड और अन्योंको आजीवन कारावासका दण्ड सुनाया था ।
उच्च न्यायालयका निर्णय, २५ नवम्बर २०२१ (गुरुवार) को सुनाया गया है । ‘मीडिया’ विवरणके अनुसार, न्यायालयने निर्णय देते हुए पश्चातापकी भावनाका उल्लेख किया । न्यायालयके अनुसार, मृत्युदण्ड प्रायश्चितकी भावनाको समाप्त कर देता है । आरोपित समूचे जीवन पश्चातापके योग्य हैं । वे पुनः समाजमें ऐसा अपराध भी नहीं कर पाएंगे; इसलिए दोषियोंको आजीवन कारावासका दण्ड दिया जाना चाहिए ।
एक न्यायालयद्वारा मृत्युदण्ड देना और दूसरे न्यायालयद्वारा इस निर्णयको पलट देना, इस प्रक्रियासे सिद्ध होता है सम्पूर्ण न्याय प्रणाली ही अविवेकपूर्ण है और इसमें योग्य सुधारकी आवश्यकता है, जो केवल हिन्दू राष्ट्रमें सम्भव है; अतः अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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