अक्तूबर १०, २०१८
स्वदेशी सुपरसोनिक मिसाइल ‘ब्रह्मोस’का विवरण (डाटा) पाकिस्तानी गुप्तचर विभाग ‘आईएसआई’को रहस्योदघाटित (लीक) करनेके आरोपी वैमानिक अभियान्त्रिकी (एयरोस्पेस इंजीनियर) निशान्त अग्रवालको दो फेसबुक खातेकेद्वारा ‘हनी ट्रैप’में फंसाया गया था । इनमें एक खाता नेहा शर्मा और दूसरा पूजा रंजनके नामसे चलाया जा रहा था । ये जानकारी उत्तरप्रदेश पुलिसकी एटीएसने (आतंक निरोधी दस्तेने) मंगलवारको न्यायालयमें दी । अब निशांतसे पूछताछ कर उत्तरप्रदेश पुलिस इन खातोंसे जुडी जानकारी जुटाएगी । इसके लिए जुटानेके लिए उत्तर प्रदेश पुलिसके आतंक निरोधी दस्तेने मंगलवारको कनिष्ठ (जूनियर) न्यायाधीश प्रथम श्रेणी एसएम जोशीकी न्यायालयमें निशांतका ट्रांजिट रिमांड मांगा ।
महाराष्ट्र एटीएसके अतिरिक्त अभियोजक एसजे बागदेने बताया कि न्यायालयने तीन दिनका रिमांड स्वीकृत कर लिया है । देर शाम उत्तरप्रदेश पुलिस निशांतको लेकर लखनऊके लिए रवाना हो गई । लखनऊमें निशांतसे पूछताछ किए जानेके अतिरिक्त उसे विशेष ‘एटीएस’ न्यायालयके समक्ष भी प्रस्तुत किया जाएगा । बता दें कि निशांत अग्रवालको उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र पुलिसकी ‘एटीएस’के संयुक्त अभियानमें सोमवारको यहां वर्द्धा रोड स्थित ब्रह्मोस सेंटरसे बन्दी बनाया गया था ।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलका विवरणके रहस्योद्घाटन (डाटा लीक) करनेके आरोपमें दबोचे गए वैमानिक अभियान्त्रिकी (एयरोस्पेस इंजीनियर) निशांत अग्रवालको फंसाने वाले दोनों खाते पाकिस्तानकी राजधानी इस्लामाबादसे चल रहे थे । इन अवैध खातोंकेद्वारा भारतमें कई अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियोंके साथ भी फेसबुकपर जुडनेका प्रयास किया गया था । उत्तरप्रदेश एटीसके जांच अधिकारीने नागपुरमें ट्रांजिट रिमांडके लिए प्रविष्ट याचिकापर सुनवाईके समय न्यायालयको ये जानकारी दी ।
इस अधिकारीने बताया कि विभागका मानना है, नेहा शर्मा और पूजा रंजन नामके इन दोनों फेसबुक खातोंको आईएसआई संचालित कर रही थी । जांच अधिकारीने बताया कि एक उच्चस्तरीय संवेदनशीलता वाली परियोजनासे जुडे होनेके पश्चात भी निशान्त अग्रवाल जालस्थलका उपयोग करनेके प्रकरणमें लापरवाह था और इसी कारण वह आईएसआईका सरलतासे लक्ष्य बन गया । जांच अधिकारीने निशांत अग्रवालके ‘लिंक्डइन’ खातेकी जांच करनेकी जानकारी भी न्यायालयको दी ।
निशांतके निजी लैपटॉपमें एटीएसको क्लासिफाइड वर्गकी जानकारियां सुरक्षित मिली हैं । पीडीएफ प्रारुपमें सुरक्षित रखी गई इन धारिकामें (फाइलोंमें) विभिन्न विशेषज्ञोंकी ओरसे की गई रेड मार्किंग भी प्रविष्ट थी । जांच अधिकारीने न्यायालयको बताया कि यह जानकारी इतनी संवेदनशील थी कि इनका किसी अन्यसे सांझा करना देशकी सुरक्षाके लिए संकट पैदा कर सकता है । नियमके अन्तर्गत ऐसी जानकारियां निजी संगणक या लैपटॉपमें रखना अपराधकी श्रेणीमें आता है ।
निशांतको ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’की धारा ३, ४, ५ व ९ सहित आईपीसीकी धारा ४१९, ४२०, ४६७, ४६८, १२० (बी) व १२१ (ए) और आईटी अधिनियमकी धारा ६६ (बी)के अन्तर्गत आरोपी बनाया गया है ।
“ये है राष्ट्रके निर्माता आजके युवा ! कामवासना और ऐशोआरामकी इतनी लत पडी है कि ये राष्ट्र भी बेच सकते हैं ! और धन्य है युवाओंका नाश करनेवाली मैकॉले शिक्षण पद्धति !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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