पुलिस अधिकारी सुबोधके पुत्रने कहा, हिन्दू-मुस्लिमके झगडेने लिए मेरे पिताके प्राण !


दिसम्बर ४, २०१८

बुलंदशहर हिंसामें हुतात्मा हुए इंस्पेक्टर सुबोधके पुत्र दुखी और क्रोधमें हैं । उनका कहना है कि जिस पिताने उन्हें ऐसा मानव बननेकी शिक्षा दी, जो धर्मके नामपर न लडे, उस पिताकी हिदू-मुस्लिम लडाईमें ही मृत्यु हो गई ।


बुलंदशहरके स्याना उपमण्डलके (तहसीलके) गांव महावमें सोमवार सुबह गोवंश अवशेष मिलनेपर पुलिस, हिन्दूवादी संगठनों और ग्रामीणोंमें जमकर टकराव हुआ । क्रोधित ग्रामीणोंने चिंगरावठी चौकीके पास सडकपर जाम लगा दिया । स्याना थानेके कोतवाल इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंहने वहांपर पहुंचकर जाम खुलवानेका प्रयास किया तो ग्रामीणोंने पथराव कर दिया ।

भीडने चौकीके बाहर खडे पुलिसके दर्जनों वाहनोंमें आग लगा दी । चौकीमें घुसकर तोडफोड की और सामानको आग लगा दी । स्थिति अनियन्त्रित होते देख पुलिसने हवाई गोलीबारी की । इसपर ग्रामीणोंने सुबोध कुमारपर आक्रमण कर दिया । घटनामें गोली लगनेसे कोतवाल सुबोध और एक युवक सुमितकी मृत्यु हो गई !

इंस्पेक्टरके हुतात्मा होनेकी जानकारी मिलते ही परिजनोंके साथ गांवमें कोहराम मच गया । हुतात्माके परिजन बुलंदशहर रवाना हो गए । पिताकी मृत्युके पश्चात इंस्पेक्टरको पुलिस विभागमें तैनाती मिली थी ।

मंगलवार सुबह पुलिस लाइनमें इंस्पेक्टर सुबोध कुमारको श्रद्धांजलि दी गई । इंस्पेक्टरके पुत्र अभिषेकने पत्रकारोंसे बातचीतमें कहा कि, मेरे पिता चाहते थे कि मैं एक अच्छा नागरिक बनूं, जो समाजमें धर्मके नामपर हिंसा नहीं फैलाता । आज मेरे पिताने हिंदू-मुस्लिमके नामपर अपने प्राण दिए, अब कल किसके पिता अपनी प्राण गंवाएंगे ?

सोमवारको मौतका समाचार सुनते ही परिवारमें कोहराम मच गया । आनन फाननमें पूरा परिवार बुलंदशहरके लिए रवाना हो गया । वहीं एटासे भी उनके सम्बन्धी बुलंदशहर पहुंच गए ।

बुलंदशहरके स्याना कोतवालीमें दंगाइयोंकी गोली लगनेसे हुतात्मा हुए प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमारकी तैनाती बिसाहडा कांडके समय थी । सुबोध जारचा कोतवाली प्रभारी थे और उन्होंने बिसाहडा कांडकी जांच की थी ।

बिसाहडामें इकलाख हत्याकांड कांडके समय सुबोध कुमार जारचा कोतवाली प्रभारी रहे थे और लगभग आठ माहका कार्यकाल उनका जारजामें रहा है । इकलाखकी मृत्युके पश्चात अगली प्रातः २९ सितम्बर २०१५ को ऊंचा अमीरपुरमें एनटीपीसीके पास भी भडकी भीड और लाठीचार्जके समय वह उपस्थित रहे थे और उस समय पुलिसने वहां मस्जिदकी सुरक्षा की थी ।

इसीके चलते वह बिसाहडा कांड होनेके पश्चात भी लगभग छह माह तक जारचा थानेमें रहे । ऊंचा अमीरपुर मोडपर लाठीचार्ज व गोलीबारीके समय ऊंचा अमीरपुर निवासी राहुल यादवके गोली लगनेका आरोप भी सुबोध कुमारपर रहा था, जिसकी न्यायिक जांच चल रही है ।  
   
ग्रामीणोंके अनुसार २८ सितम्बर २०१५ को बिसाहडा गांवमें इकलाखकी भीडने पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी । इस मध्य वहांपर पाया गया मांस और शीतकपाटिकामें (फ्रिजमें) रखे मांसको अपनी देख रेखमें पहले जिला पशु केन्द्र और बादमें मथुरा स्थित जांच केन्द्रमें भेजा था । इसप्रकार वे न्यायिक जांचमें वह साक्ष्य भी थे ।

सुबोध कुमारके हुतात्मा हो जानेसे इकलाख प्रकरणमें झटका लगा है । इकलाखके घरसे मिले मांसको उन्होंने ही बरामद किया था ।

 

स्रोत : अमर उजाला



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