अक्तूबर २, २०१८
दक्षिण कश्मीरके शोपियांमें पुलिस थानेपर हुए आक्रमणमें आतंकियोंके बुर्का पहनकर प्रहार करनेका प्रकरण उजागर हुआ है । यह जानकारी सुरक्षा बलोंके लिए चिन्ताजनक है, क्योंकि पिछली कई घटनाओंमें आतंकियोंने अन्वेषण अभियानमें आक्रमणके समय इसका आश्रय (सहारा) लिया था ! रविवारको पुलिस थानेमें आक्रमण कर आतंकियोंने एक पुलिसकर्मीकी हत्या कर दी थी !
अधिकारियोंके अनुसार गत एक वर्षमें एक दर्जनसे अधिक ऐसी घटनाओंकी पुष्टि हुई है, जिनमें आतंकियोंने बुर्केका आश्रय लिया । यद्यपि ऐसी घटनाओंके वास्तविक आंकडे इससे भी अधिक हो सकते हैं । ऐसे आतंकियोंसे निपटनेके लिए सुरक्षा बल अन्वेषण अभियानके समय महिलाकर्मियोंको साथ लेने पर विचार कर रही हैं ।
एक अधिकारीने कहा, “यह देखा गया है कि अन्वेषण अभियान और आतंकियोंकी घेरेबन्दीके समय बहुत से स्थानीय लोग और विशेष रूपसे महिलाएं आगे आ गईं, जिसके कारण भ्रम पैदा हुआ और उसका लाभ उठाकर आतंकी वहांसे भागनेमें सफल रहे ।” एक घटनाके बारेमें बताते हुए अधिकारीने कहा कि इस वर्ष गणतन्त्र दिवसके अवसरपर भिडन्तके समय दो महिलाओंको उलझनमें गोलियां लग गई थीं ! तब सुरक्षा बल हिजबुल मुजाहिदीनके दो आतंकियोंको पकडनेका प्रयास कर रहे थे ।
इन दोनों आतंकियोंको मार गिराया गया था । बादमें समीर अहमद वानी और फिरदौस अहमदके रूपमें इनका संज्ञान (पहचान) हुआ था । ये दोनों आतंकी बुर्का पहनकर भागनेके प्रयासमें थे । इन आतंकियोंसे निपटनेके मध्य उलझनमें ही वानीकी बहन सहित दो महिलाओंको गोली लग गई थी ।
“महत्वपूर्ण क्या है, एक पन्थकी छोटीसी निरर्थक प्रथा अथवा राष्ट्र ?, यह ये देश स्वयं निर्धारित करें ! क्या तुष्टिकरणके कारण हमारा राष्ट्रधर्म भी नष्ट हो चुका है, क्या ऐसी प्रथा अथवा वस्तुको प्रतिबन्धित नहीं करना चाहिए ?, स्वयं सोचें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
Leave a Reply