मई ४, २०१९
केरलमें ‘मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी’के अध्यक्ष डॉ. पीए फजल गफूरको अज्ञात व्यक्तिने भ्रमणभाषपर मारनेकी चेतावनी दी । गफूरने एक दिवस पूर्व ही अपने शिक्षण संस्थानोंमें छात्राओंके बुर्का पहननेपर रोक लगाई थी । गफूरने पुलिस थानेमें प्राथमिकी (एफआईआर) प्रविष्ट कराई है । उन्होंने परिवादमें बताया कि आरोपीने शुक्रवारको अन्तर्राष्ट्रीय भ्रमणभाष क्रमांकसे अपशब्द कहते हुए मारनेकी चेतावनी दी ।
‘मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी’की स्थापना १९६४ में हुई थी । आज इसके ३५ महाविद्यालय और ७२ विद्यालय चलते हैं । अध्यक्ष गफूरने २ मईको एक अधिसूचना जारी की । इसके अन्तर्गत सभी महाविद्यालय और विद्यालयोंमें बुर्केपर प्रतिबन्ध लगाया गया । यह अधिसूचना सभी सम्बन्धित संस्था प्रमुख और अधिकारियोंको जारी की गई थी ।
अध्यक्ष गफूरने शैक्षणिक वर्ष २०१९-२० से इस आदेशपर ध्यान देनेके निर्देश दिए थे । इसमें विद्यार्थियों, अध्यापकों और कर्मचारियोंको भी इस आदेशका पालन करना अनिवार्य था । उन्होंने कहा कि इस्लामका अनुसरण करना अनुचित नहीं; परन्तु मध्यकालकी इस्लाम पद्धतियोंका अनुसरण उचित नहीं है ।
अध्यक्षका यह आदेश उस समय आया था, जब शिवसेनाने भी अपने मुखपत्र ‘सामना’में देशकी सुरक्षाको लेकर बुर्केपर प्रतिबन्ध लगानेकी मांग की थी । इसमें श्रीलंकामें ईस्टरके दिन हुए विस्फोटका भी वर्णन किया था ।
“इस्लामकी ये परम्पराएं जितनी सडी और गली मध्यकालमें थी, उससे भी अधिक आज है । बलपूर्वक निराधार प्रथाओंको ढोया जा रहा है और जो बाहर आना चाहते हैं, उन्हें विषैले जिहादी बाहर नहीं आने देना चाहते हैं; परन्तु इन परम्पराओंको अब अधिक नहीं ढोया जा सकता है; क्योंकि अब धीरे-२ मुस्लिम महिलाओंका भी विवेक जागृत होने लगा है और वे भी इससे मुक्ति चाहती हैं ! सभी सभ्य और बुद्धिजीवि मुसलमानोंने इस असभ्य परम्पराके विरुद्ध मुखर होकर बोलना चाहिए !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : भास्कर
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