मन्दिरसे प्रतिमाएं चोरी, न्यायालयने भगवानको ही उपस्थित होनेका दिया आदेश, मद्रास उच्च न्यायालयने निर्णयको किया निरस्त


०८ जनवरी, २०२२
 
         तमिलनाडुके तिरुपुर जनपदसे विवादस्पद निर्णय न्यायालयने दिया है । भगवानकी प्रतिमा चोरीके एक प्रकरणमें कुंबकोणम जनपद स्थित जनपद न्यायालयने भगवानको ही न्यायालयमें प्रस्तुत किए जानेका आदेश दे दिया । इसके पश्चात जब भक्तोंने इसके विरुद्ध उच्च न्यायलयका द्वार खटखटाया तो उच्च न्यायालयने कनिष्ठ (निचली) न्यायालयके निर्णयको निरस्त कर दिया एवं असन्तोष व्यक्त किया । उन्होंने जनपद न्यायालयके निर्णयको निरस्त करते हुए कहा कि न्यायालयमें भगवानको केवल निरीक्षण या सत्यापनके लिए नहीं बुलाया जा सकता है । जैसे कि यह एक आपराधिक प्रकरणका भौतिक उद्देश्य है ।
         तिरुपुर जनपदमें प्राचीन मन्दिर रुलमिघु परमासिवन स्वामी थिरुक्कोइलसे ‘मूलावार’ देवताकी प्रतिमा चोरी हो गई थी । इस प्रकरणमें स्थानीय भक्तोंने पुलिसमें इसकी प्राथमिकी प्रविष्ट की थी । कुछ दिवसमें ही ‘पुलिस’ने चोरी की गई प्रतिमाको प्राप्तकर चोरीके प्रकरणसे निपटनेवाले विशेष न्यायालयमें प्रस्तुत किया और उसके पश्चात इसे मन्दिरको लौटा दिया गया । भगवानकी प्रतिमा मिलनेके पश्चात मन्दिर प्रशासनने कुम्भाभिषेक धार्मिक अनुष्ठान करके प्रतिमाको मन्दिरमें पुनः स्थापित किया था । याचिकाकर्ताके अनुसार, प्रतिमाकी स्थापनाके पश्चात इसे हटाया नहीं जा सकता; परन्तु विशेष न्यायालयके निर्णयके पश्चात मन्दिरके मुख्य कार्यकारी अधिकारीने न्यायालयमें प्रस्तुतकर प्रतिमाको वहांंसे विस्थापित करनेका प्रयास किया, जिसका भक्तों और स्थानीय लोगोंने कठोर विरोध करते हुए उच्च न्यायालयका द्वार खटखटाया । उच्च न्यायालयने अपने निर्णयमें स्पष्ट कहा कि प्रतिमाको भक्त भगवान मानते हैं और केवल निरीक्षणके लिए भगवानको न्यायालयमें नहीं बुलाया जा सकता है ।
         भगवान तो यत्र तत्र सर्वत्र हैं; किन्तु यदि भाव व अन्तरचक्षु बलाढ्य बुद्धिके अहङ्कारवश सुप्त हो तो भगवान प्रत्यक्ष उपस्थित भी हो तो भी अभिज्ञान नहीं किया जा सकता । जिस प्रकार सत्शिष्य लिए गुरु, पतिव्रता स्त्रीके लिए पति, सद्ग्रहस्थके लिए पंचयज्ञ, व्यवसायीके लिए सत्यनिष्ठ ग्राहक ईश्वर होता है, उसी प्रकार आदर्श व निष्पक्ष न्यायाधीश व अधिवक्ताके लिए निर्दोष याचिकाकर्ता व पक्ष ही भगवान है और उसे त्वरित न्याय प्रदान करना धर्म है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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