अमृतवाणी

श्रीगुरु उवाच


मैं साधकोंके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं ! मेरा हिन्दू राष्ट्रका स्वप्न सत्य होनेके लिये १०० संतोंकी आवश्यकता है । संतोंद्वारा प्रक्षेपित होनेवाले सत्त्वगुणके कारण पृथ्वीपर रज –तमका प्रदूषण न्यून होकर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना और जगभरमें हिन्दु धर्मका प्रसार–कार्य सुलभ होगा । अब तक ४२ संत हुए हैं । ४९१ साधक ६० प्रतिशतसे अधिक स्तरके […]

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श्रीगुरु उवाच


नींदसे आनंद प्राप्त होता है तो, ध्यानसे कितना आनंद प्राप्त होता होगा ! -परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले (१९.७.२०१४)

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श्रीगुरु उवाच


आधुनिक पीढी लैंगिक शिक्षणके कारण उद्ध्वस्त न हो; इसलिए हिन्दू राष्ट्रमें उस शिक्षणपर प्रतिबन्ध होगा ! सत्य, त्रेता और द्वापर युगमें लैंगिक विषयोंपर कोई चर्चा नहीं होती थी । उसकी आवश्यकता भी नहीं लगी; क्योंकि लैंगिकता एक नैसर्गिक विषय है । पशु-पक्षियोंको भी इसका शिक्षण कोई नहीं देता, कैसे निद्रा लें ?, यह जैसे सीखना […]

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श्रीगुरु उवाच


परम पूज्य डॉ. आठवले एवं अन्योंके लेखनमें भेद                               मेरा लेखन बहुधा आध्यात्मिक भाषामें होता है, उसमें क्या सीख सकते हैं, यह अधिक प्रमाणमें होता है । उसमें भावना या भावका स्तर अल्प होता है; अतः अनेक व्यक्तियोंद्वारा उसे पढना कठिन होता है । इसके विपरीत अन्योंके लेख भावना या भावके स्तरपर एवं सरल भाषामें […]

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श्रीगुरु उवाच


आजकल अनेक घरोंमें बच्चोंके साधनाका विरोध करनेवाले हिरण्यकश्यपु तथा कैकेयी हैं ! सत्ययुगमें एक हिरण्यकश्यपु था । उसका पुत्र प्रह्लाद साधना करता था, इसलिए हिरण्यकश्यपुने उसके साथ अतिशय छल किया । उसके प्राण लेने हेतु अनेक प्रयत्न किए; परन्तु प्रह्लादकी ईश्वरने प्रत्येक बार रक्षा की । अब कलियुगमें एक हिरण्यकश्यपु नहीं; अपितु अनेक घरोंमें हिरण्यकश्यपु […]

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ग्रन्थोंसे होनेवाला लाभ


ग्रन्थोंसे होनेवाला लाभ धर्मविषयी लेखन करते समय जिस प्रकार धर्मग्रन्थोंका लाभ होता है, उसीप्रकार राष्ट्र सम्बन्धित लेखन करते समय विचारकोंका ग्रन्थ तथा लेखोंका लाभ होता है; फलस्वरूप स्वयं अनेक वर्ष विचार कर किसी विषय सम्बंधित लिखनेमें समय व्यर्थ नहीं होता । (१६.१.२०१४) -परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले

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श्रीगुरु उवाच


पटाखोंको अनुमति देनेवाली सर्वपक्षीय सरकारें समाजद्रोही, राष्ट्रद्रोही एवं धर्मद्रोही हैं  ! पटाखोंके कारण अब्जों (अरबों) रूपये अक्षरशः जल जाते हैं एवं इससे पर्यावरण एवं आरोग्यकी अपरिमित हानि होती है, साथ ही जब जनता अत्यधिक दारिद्र्यमें दिन काट रही है तो, स्वतंत्रतासे लेकर आजतक सर्वपक्षीय सरकारोंने पटाखोंकी अनुमति कैसे दी ? यह समाजद्रोह, राष्ट्रद्रोह एवं धर्मद्रोह है […]

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श्रीगुरु उवाच


शब्द योग्य प्रकारसे न लिखनेपर होनेवाला भाषाका विनोद एक लेखका शीर्षक था,`Saints and Sad Gurus'(संत तथा दुःखी गुरु ) शीर्षकसे अर्थबोध नहीं हुआ; तो पढकर देखा, तब समझमें आया कि वह शीर्षककी चूक थी, `Saints And Sadgurus’ (संत तथा सद्गुरु) यह होना चाहिए था । इस घटनासे ज्ञात हुआ कि कोई भी लेख प्रकाशित करनेसे […]

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श्रीगुरु उवाच


हिन्दुओं ! परिवर्तन लानेके लिए पुलिसके डंडोंसे न डरते हुए पुलिसके अत्याचारोंके विरुद्ध उनके वरिष्ठोंसे परिवाद (शिकायत) करें ! एक घटनामें पुलिसने एक हिन्दू एवं उसके कुटुंबियोंपर अत्याचार किए । इस घटनापर पुलिसमें प्राथमिकी प्रविष्ट करानेपर भी (FIR) पुलिसने अत्याचारी पुलिसवालोंके विरुद्ध कार्यवाही नहीं की । पुलिसके इस अनैतिक वर्तनके विरोधमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियोंके पास […]

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श्रीगुरु उवाच


‘बुद्धिप्रामाण्यवादियोंके बहकावेमें आकर बुद्धिके परे जो धर्म है, उसे छोडनेसे ही जगतके अन्य सभी धर्मियोंकी अपेक्षा हिन्दुओंकी अधिक दयनीय स्थिति हुई है ।-परात्पर गुरु परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (२७.१२.२०१४) (मुसलमान और ईसाई अपने धर्मगुरुओंके आदेशको अंतिम आदेश मानकर उनका पालन करते हैं वहीं मैकालेकी शिक्षण पद्धतिमें शिक्षित अधिकांश हिन्दू नास्तिक और निधर्मी बुद्धिवादके प्रपंचमें सरलतासे […]

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