अमृतवाणी

शक्ति, शिवके संग न हो तो नाशक होगी


विज्ञान शक्तिसे सम्बंधित शास्त्र है,तो अध्यात्म शास्त्र शिवसे सम्बंधित । शक्ति, शिवके अर्थात  धर्मके (सत्यके) साथ होगी तो ही कल्याणकारी होगी । शक्ति, शिवके संग न हो तो नाशक  होगी । – पूज्य डॉ. बसंत आठवले

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पति-पत्नी चाहे एक-दूसरेसे दूर हों या निकट एक-दूसरेको दुःख अथवा आनंद देना !


पति-पत्नी चाहे एक-दूसरेसे दूर हों या निकट एक-दूसरेको दुःख अथवा आनंद देना !    १. पत्नी निकट हो या दूर उसके कारण रक्तदाबका विकार हुआ ऐसा कहनेवाला पति ! एक बार एक पतिको रक्तदाबका (ब्लड प्रेशरका) विकार हुआ । तब वह पत्नीसे बोला, “तुम कलह करती हो; इसलिए मुझे रक्तदाबका विकार हुआ है । कार्यालयीन कार्यसे […]

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श्रीगुरु उवाच


एकसाथ दृष्टि उतारनेका दुष्परिणाम एकसाथ दृष्टि उतारनेपर कभी एकसे निकली अनिष्ट शक्ति वहीं उपस्थित दूसरे व्यक्तिमें प्रवेश कर सकती है। (४.१०.२०१४) -परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले

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श्रीगुरु उवाच


चुनावके समय राजनीतिक पक्षोंके आश्वासनोंपर अवलम्बित मत रहो ! स्वतंत्रतासे आजतक राष्ट्र तथा धर्मके लिए कुछ भी न करनेवाले सभी राजनीतिक पक्ष आगे कुछ करेंगे, इस आश्वासनपर विश्वास करनेवाली तथा यह आश्वासन एक प्रकारकी लालच, ‘रिश्वत’ है, यह न समझनेवाली जनताके भविष्यमें कौटुम्बिक, आर्थिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एवं धार्मिक इत्यादि सभी प्रकारकी अपरिमित हानि ही लिखी […]

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श्रीगुरु उवाच


हिन्दुओं अपने पुत्रोंको शिक्षण हेतु अथवा नौकरी हेतु विदेशोंमें भेज उनकी तथा स्वयंकी जन्मजन्मांतरकी हानि न करें ! १. पुत्रोंकी हानि : कुछ पालक अपने पुत्रोंको शिक्षण हेतु विदेश भेजते हैं और बडे अभिमानसे कहते हैं, हमारा बेटा अमेरिकामें है, उनकी समझमें यह नहीं आता कि पुत्रको विदेश भेजकर वे उसके अनेक जन्मोंकी हानि कर […]

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श्रीगुरु उवाच


धर्मशिक्षणका अभाव एवं आरक्षणके कारण हिन्दू नामशेष होनेके मार्गपर ! सङ्घे शक्तिः कलौ युगे । अर्थात् संगठित होना ही कलियुगकी शक्ति है, हिन्दू असंगठित हैं, इसलिए उनमें बल नहीं है; इसलिए अल्पसंख्यक प्रतिदिन उनपर अत्याचार करते हैं । हिन्दुओंके असंगठित होनेके निम्न कारण हैं । १. धर्मशिक्षणका अभाव : हिन्दुओंको धर्मशिक्षण नहीं है इस कारण […]

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श्रीगुरु उवाच


नामजपमें वैखरी वाणीका लाभ सामान्य रूपसे हम जो नित्य बोलते हैं, उस वाणीको वैखरी वाणी कहते हैं । साधनामें नामजप करते हुए वैखरीसे मध्यमा, पश्यंती एवं परा वाणीमें जप करते हुए आगे जाना होता है । यह साध्य करना आरम्भमें कठिन होता है; अतः वैखरी वाणीमें जप करनेसे जप सुनाई देता है; इसलिए जपपर मन […]

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श्रीगुरु उवाच


आजके राजनेताओंके कारण हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य है ! राष्ट्र एवं धर्म नष्ट होनेकी स्थिति है, तब भी राजनेता, लोकप्रतिनिधि तथा राज्यकर्ता, पर्यटन, पब (आधुनिक मद्यशाला एवं नृत्यशाला) बिकिनी इत्यादी विषयोंपर वार्तालाप तथा विवाद करते हैं । मृतवत् जनता केवल सुनती है । इसमें परिवर्तन लाकर देशका पूर्ववत् वैभव प्राप्त करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना […]

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श्रीगुरु उवाच


माता-पिताके प्रति होनी चाहिए कृतज्ञता ! किसीने थोडी बहुत सहायता की, तब भी हम उनके प्रति कृतज्ञ होते हैं । माता-पिता तो हमें जन्म देते हैं, हमें शैशव अवस्थासे बडा करते हैं; अतः उनके प्रति कितनी कृतज्ञता होनी चाहिए ?, माता-पिताके वृद्ध होनेके पश्चात अन्तिम समयतक उनका ध्यान रखना, यह कृतज्ञता व्यक्त करनेका एक मार्ग […]

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श्रीगुरु उवाच


आजके राजनेताओंके कारण हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य है ! राष्ट्र एवं धर्म नष्ट होनेकी स्थिति है, तब भी राजनेता, लोकप्रतिनिधि तथा राज्यकर्ता, पर्यटन, पब (आधुनिक मद्यशाला एवं नृत्यशाला) बिकिनी इत्यादी विषयोंपर वार्तालाप तथा विवाद करते हैं । मृतवत् जनता केवल सुनती है । इसमें परिवर्तन लाकर देशका पूर्ववत् वैभव प्राप्त करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना […]

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