या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणा वरदण्ड मण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युत शङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।। अर्थ : जो विद्याकी देवी भगवती सरस्वती कुन्दके फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोतीके हारके समान धवल वर्णकी हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथमें वीणा-दण्ड शोभायमान […]
गोविंदाय नमः । विष्णवे नमः । मधुसूदनाय नमः। त्रिविक्रमाय नमः । वामनाय नमः । श्रीधराय नमः । हृषीकेशाय नमः ।पद्मनाभाय नमः। दामोदराय नमः। संकर्षणाय नमः । वासुदेवाय नमः। प्रद्युम्नाय नमः। अनिरुद्धाय नमः। पुरुषोत्तमाय नमः। अधोक्षजाय नमः। नारसिंहाय नमः। अच्युताय नमः। जनार्दनाय नमः। उपेन्द्राय नमः। हरये नमः । श्रीकृष्णाय नमः।।
काये न वाचा मनसेंद्रियैर्वा । बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् ।। करोमि यद्यत् सकलं परस्मै । नारायणायेति समर्पयामि ।। अर्थ : हे नारायण ! मैं जो भी मेरे शरीर, मन , वचन , इंद्रिय , बुद्धि और आत्मा से सोच समझ कर या अज्ञानतावश हो रहा है, मैं वह सब आपके श्री चरणों में समर्पित करती हूंं /करता हूं।
गणेश स्तुति प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये ॥ १॥ अर्थ : नारद जी बोले – पार्वतीनन्दन श्री गणेशजीको सिर झुकाकर प्रणाम करें और उसके पश्चात् अपनी आयु , कामना और अर्थकी सिद्धि हेतु उन भक्तनिवासका नित्यप्रति स्मरण करें ।।१।। प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् । तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २॥ […]
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ।। अर्थ : हे महामाया ! हे श्रीपीठकी मुख्य अधिष्ठात्री ! देवोंद्वारा पूजित, शंख चक्र गदा हस्तमें धारणकी हुई हे महालक्ष्मी, तुझे नमस्कार है !
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता । न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि । अर्थ : हे भवानी ! न पिता, न माता, न बंधु, न दाता, न पुत्र, न पुत्री, न सेवक, न स्वामी, न पत्नी, न विद्या, न मन शाश्वत […]
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।। पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीतिचाष्टकम् ।। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।। अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्येगतोरणे। विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः।। न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे। नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि।। सर्व मंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । […]
सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः | लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः | धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः । द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि । विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा । संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ।। अर्थ : सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट,विघनाश, गणाधिप, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र, गजानन – जो विद्या आरंभ करनेसे पूर्व, विवाहके समय , प्रवेश […]
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ।। अर्थ : सभी विघ्नोंके निवारण हेतु श्वेत वस्त्र धारण करनेवाले, शशि वर्णयुक्त (श्वेतवर्ण), प्रसन्न चित्त, चतुर्भुज श्रीगणेशका ध्यान करना चाहिए ।
मूषिकवाहन् मोदकहस्त चामरकर्ण विलम्बित सूत्र । वामनरूप महेश्वरपुत्र विघ्नविनायक पाद नमस्ते ।। अर्थ : हे प्रभु, मूषक जिनका वाहन है, जिनके हस्तमें मोदक है ,चामर समान जिनके कर्ण हैं, जिन्होंने जेनऊ धारण कर रखा है, जिनका कद वामन रूप है और जो विघ्नहर्ता हैं ऐसे श्री विनायक, शिवपुत्र को, मेरा नमन है !