श्रीगुरु उवाच

राजनीतिज्ञो ! विकासकी गप्पें हांककर, आप सभी लोगोंकी आंखोंमें सदैव धूल नहीं झोंक सकते !


अंग्रेजीमें एक उक्ति है- You can fool some of the people all the time and all the people some of the time, but you cant fool all the people all the time. अर्थात: आप कुछ लोगों की आंखोंमें सदैव ही धूल झोंक सकते हैं तो कुछ समयतक सभी लोगोंकी आंखोंमें अवश्य ही धूल झोंक सकते […]

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श्रीगुरु उवाच


अंग्रेजीमें कहते हैं, ‘People get government they deserve’, अर्थात प्रजाकी योग्यता जैसी होती है, उसे वैसे ही राज्यकर्ता मिलते हैं । यह बात भारतमें पूर्णरूपेण लागू होती है । सत्ययुगमें प्रजा सात्त्विक थी; अतः राजाकी आवश्यकता नहीं थी । त्रेतायुगमें प्रजाको श्रीराम जैसे राजा मिले । द्वापरयुगमें सत्त्व-रज प्रधान प्रजा होनेसे कुछ काल दुर्योधन तो […]

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श्रीगुरु उवाच


साधनामें गम्भीरता न हो तो, ईश्वर भी तुम्हारी ओर गम्भीरतासे नहीं देखेंगे । -परात्पर गुरु डॉ . जयन्त आठवले (१०.१०.२०१४ )

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प्रधान गुणानुसार मनोवृत्ति


१. तामस : मुझे कष्ट हुआ तो चलेगा; पर दूसरेको कष्ट होना ही चाहिए । २. राजस : मेरा भला हो; इसलिए दूसरेको कष्ट हो तो चलेगा। ३. सात्त्विक : दूसरेके हितके लिए, मुझे कष्ट हो जाए तो चलेगा ।

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केवल नामस्मरणसे होनेवाली हानि  !


केवल नामस्मरण करनेसे हम अच्छी साधना करते हैं ऐसा लगता है; परन्तु इससे केवल मनका त्याग होगा; तन तथा धनका त्याग नहीं होगा; इस कारण विशेष प्रगति नहीं होगी  – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (४.१०.२०१४) (नामजपके साथ ही तनसे, धनसे, बुद्धि और कौशल्यसे प्रतिदिन ईश्वरप्राप्ति हेतु प्रयास करना अति आवश्यक है, इस सुवचनसे श्रीगुरु यह […]

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हिंदुओंमें अपने सन्दर्भमें विश्वास निर्माण किया जाए


मुसलमानोंका तुष्टिकरण करनेसे अच्छा है, हिंदुओंमें अपने सन्दर्भमें विश्वास निर्माण किया जाए तो, कोई भी पक्ष बार-बार चुनकर आएगा ! (२४.६.२०१३)- परात्पर गुरु  डॉ. जयंत आठवले

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श्रीगुरु उवाच :


प्रार्थना १. ईश्वरसे कुछ मांगना हमारी पात्रता बिना ईश्वर कुछ देते नहीं । ऐसेमें ईश्वरसे क्यों प्रार्थना करें ऐसा कुछ लोग सोचते हैं । इसका उत्तर यह कि प्रार्थनासे नम्रता आती है । प्रार्थनाके साथ अन्य कोई भी साधना करनेसे नम्रता निर्माण होती  है । उसके पश्चात् जो चाहिए,  ईश्वर देते हैं । २. ईश्वरसे […]

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मानवकी ईश्वरपर श्रद्धा


बन्दरियाके बच्चेको अपनी मांपर पूर्ण श्रद्धा होती है; इसलिए बंदरिया जब १०-१५ फीटकी दूरीपर, एक पेडसे दूसरे पेडपर कूदती जाती है तब भी उसके पेटको भींचकर कर बैठे बच्चेको डर नहीं लगता । इसके विपरीत मानवकी ईश्वरपर श्रद्धा नहीं होनेके कारण वह ईश्वरको पूर्ण श्रद्धासे पकडकर नहीं रखता, वह ईश्वरको छोड देता है, इसलिये ईश्वर […]

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ईश्वर हमारे हृदय में रहते हैं


किसीने बच्चोंसे ऐसा नहीं कहना चाहिए कि ईश्वर ऊपर आकाशमें रहते हैं बल्कि यह कहना चाहिए कि वे हमारे हृदयमें रहते हैं – परम पूज्य भक्तराज महाराज

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श्रीगुरु उवाच


येन केन प्रकारेण, अर्थात कुछ भी कर चुनाव जीतना इतना ही स्वार्थी राजनीतिज्ञोंका ध्येय होता है, अतः वे आदर्श राज्यकी स्थापना नहीं कर सकते हैं। इसके विपरीत हिन्दू राष्ट्रकी अर्थात आदर्श राष्ट्रकी स्थापना करना , यह धर्माभिमानका ध्येय होता है; इसलिए वे ही  हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना कर सकते हैं । -परात्पर गुरु डॉ . जयंत […]

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